खजराना गणेश मंदिर में मिला 51 किलो चांदी का प्राचीन श्री यंत्र; जानें इसका धार्मिक महत्व
इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में गर्भगृह के जीर्णोद्धार के दौरान 51 किलो चांदी का 26 साल पुराना रजत श्री यंत्र प्राप्त हुआ है। इसके दर्शन और पूजन से वास्तु दोष व आर्थिक संकट दूर होते हैं।
इंदौर। मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी इंदौर का प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर अपनी अलौकिक महिमा और श्रद्धालुओं की मनोकामना सिद्धि के लिए विश्वभर में चर्चित है. हाल ही में मंदिर परिसर में चल रहे जीर्णोद्धार कार्य के दौरान एक अद्भुत और दुर्लभ घटना सामने आई है, जब गर्भगृह की छत से 51 किलो वजन का प्राचीन 'रजत श्री यंत्र' (चांदी का श्री यंत्र) प्राप्त हुआ है.
बताया जाता है कि लगभग ढाई दशक (26 साल) पहले इस पवित्र श्री यंत्र को मंदिर की छत में स्थापित कराया गया था. इसके पुन: दर्शन होने के बाद से ही खजराना गणेश मंदिर में दर्शनार्थियों और गणेश भक्तों का भारी हुजूम उमड़ रहा है.
देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा स्थापित इस ऐतिहासिक मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गर्भगृह के मुख्य द्वार को चौड़ा करने का कार्य किया जा रहा था. इसी निर्माण कार्य के दौरान मंदिर की छत से यह विशाल चांदी का श्री यंत्र मिला.
यह श्री यंत्र 51 किलोग्राम शुद्ध चांदी की पट्टिका पर उकेरा गया है, जिस पर भगवान गणेश के प्रमुख सिद्ध मंत्र, स्तोत्र और उनकी आराधना के पवित्र प्रतीक चिन्ह अंकित हैं.
मंदिर के मुख्य पुजारी अशोक भट्ट ने बताया कि लगभग 26 वर्ष पूर्व मंदिर के तत्कालीन मुख्य पुजारी स्वर्गीय पंडित भालचंद्र भट्ट द्वारा इस रजत श्री यंत्र को पूर्ण धार्मिक विधि-विधान के साथ मंदिर की छत पर स्थापित कराया गया था.
पुजारी अशोक भट्ट के अनुसार, श्री यंत्र को गर्भगृह की छत पर स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य यही था कि मंदिर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु पर इसका प्रभाव पड़े, उनकी मनोकामनाएं पूरी हों तथा संपूर्ण मंदिर परिसर में दिव्य भव्यता और सकारात्मक ऊर्जा (Positivity) बनी रहे.
रजत श्री यंत्र से जुड़ी प्रमुख जानकारियों का संक्षिप्त विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विवरण / पहलू | महत्वपूर्ण जानकारी |
| स्थान | खजराना गणेश मंदिर, इंदौर (अहिल्याबाई होल्कर कालीन) |
| यंत्र की धातु व वजन | 51 किलोग्राम शुद्ध चांदी (रजत पट्टिका) |
| स्थापना का समय | 26 वर्ष पूर्व (दिवंगत पं. भालचंद्र भट्ट द्वारा) |
| यंत्र पर अंकित | गणेश जी के सिद्ध मंत्र और धार्मिक प्रतीक चिन्ह |
| मुख्य लाभ | वास्तु दोष निवारण, मनोकामना पूर्ति व सकारात्मक ऊर्जा |
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रावण का पवित्र महीना देवों के देव महादेव को समर्पित होता है. चूंकि भगवान गणेश, शिव जी के पुत्र हैं, इसलिए श्रावण मास में शिव आराधना के साथ-साथ श्री यंत्र का दर्शन व पूजन अत्यंत फलदायी माना गया है.
पुजारी अशोक भट्ट बताते हैं कि श्रावण मास में श्री यंत्र की पूजा करने से:
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घर और व्यापार स्थल से नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) समाप्त होती है.
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वास्तु दोष दूर होते हैं और अटके हुए धन की प्राप्ति होती है.
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पारिवारिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की निरंतरता बनी रहती है.
हिंदू धर्म में भगवान गणेश का श्री यंत्र उनकी असीम शक्ति और आशीर्वाद का प्रतीक माना गया है. यह बुद्धि, एकाग्रता, सफलता और विघ्नों के नाश का कारक है.
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