शिवपुरी के ऐतिहासिक नरवर किले से अष्टधातु की तोप चोरी, पुलिस के हाथ लगे अहम सुराग
शिवपुरी के ऐतिहासिक नरवर किले से चोरी हुई 400 साल पुरानी और 3.5 टन वजनी तोप मामले में बड़ा खुलासा! क्या इस तोप से राजस्थान का पांचना बांध उड़ाने की थी साजिश? पढ़ें पुलिस जांच की पूरी रिपोर्ट।
शिवपुरी: मध्य प्रदेश के शिवपुरी में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से 15 जुलाई 2026 की रात चोरी हुई 3.5 टन वजनी और 400 साल पुरानी तोप के मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। पुलिस की जांच में अष्टधातु और एंटीक तस्करी के अलावा राजस्थान के करौली जिले में स्थित पांचना बांध को नुकसान पहुंचाने की आशंका का एंगल भी शामिल हो गया है।
🚨 दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ
तोप का सुराग राजस्थान के करौली (हिंडौन क्षेत्र) के गावड़ा मीणा गांव से मिलने के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस संयुक्त कार्रवाई कर रही है। पुलिस जेसीबी और अंडरग्राउंड मेटल डिटेक्टर्स की मदद से खुदाई कर सघन तलाशी अभियान चला रही है। मामले की कड़ी जोड़ते हुए पुलिस ने दो स्थानीय संदिग्धों- टिम्मू मीणा और अमन मीणा को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। इसके साथ ही चोरी में इस्तेमाल की गई बोलेरो पिकअप भी जब्त कर ली गई है।
💣 क्षेत्र में सनसनी फैलाने और बांध को नुकसान पहुंचाने की साजिश
मामले की जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को कुछ ऐसे इनपुट मिले हैं, जिन्होंने पुलिस के होश उड़ा दिए हैं। राजस्थान के करौली-हिंडौन इलाके में स्थित पांचना बांध के पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से स्थानीय स्तर पर खींचतान और संघर्ष का इतिहास रहा है। इसलिए पुलिस को आशंका है कि आरोपियों ने यह तोप पांचना बांध के ढांचे को क्षतिग्रस्त करने या क्षेत्र में सनसनी फैलाने के मकसद से चुराई है। पुलिस अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह और स्थानीय तोड़फोड़ की साजिश, दोनों ही एंगलों से मामले की गहराई से जांच कर रही है।
🏰 पहली चोरी की कोशिश रही थी नाकाम
ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, राजा नल-दमयंती और बाद में कछवाहा राजपूतों तथा सिंधिया राजवंश से जुड़े नरवर किले के परिसर में 14 दुर्लभ तोपें प्रदर्शित थीं। आरोप है कि 15 जुलाई की रात चोरों का एक संगठित गिरोह किले के पिछले पथरीले और सुरक्षा-विहीन रास्ते से घुसा। चोर भारी गाड़ियों और क्रेन-ट्रॉली की मदद से भारी-भरकम अष्टधातु और मिश्रित धातुओं से बनी तोप को नीचे उतारकर ले भागे। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने इससे पहले 5 जुलाई को भी तोप खिसकाने का प्रयास किया था, लेकिन वजन अधिक होने के कारण वे पहली बार में नाकाम रहे थे।
💧 पांचना बांध के पानी को लेकर विवाद
साल 2006 में आरक्षण आंदोलन के दौरान मीणा और गुर्जर समाज के बीच तनाव बढ़ा था, जिसके चलते प्रशासन ने एहतियातन बांध की नहरों से पानी छोड़ना बंद कर दिया था। कमांड क्षेत्र की नहरों से जुड़े 35 से अधिक गांव मीणा बहुल हैं। उनका तर्क है कि बांध का निर्माण उनकी खेती की सिंचाई के लिए ही हुआ था, इसलिए बंद नहरें तुरंत खोली जाएं।
🗣️ गुर्जर समाज का क्या है पक्ष?
बांध के आसपास और डूब क्षेत्र के लगभग 39 गांव गुर्जर बहुल हैं। गुर्जर समाज का तर्क है कि जब तक उनकी जमीनों के बदले लिफ्ट सिंचाई योजना और सही मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक पानी नीचे न छोड़ा जाए। वर्ष 2006 से नहरें बंद रहने के कारण दर्जनों गांवों में सिंचाई का भारी संकट बना हुआ है और यह मामला आज भी क्षेत्रीय राजनीति व सामाजिक खींचतान की एक बड़ी वजह है।
💥 पानी के विवाद को सुलझाने के लिए तोप चोरी की साजिश!
आरोप है कि इसी विवाद को हमेशा के लिए हल करने की कोशिश में मीणा समाज के कुछ लोग तोप ले जाकर पांचना बांध को उड़ा देने की खौफनाक साजिश रच रहे थे। इनपुट्स के मुताबिक, आरोपियों ने चोरी से पहले तोप के इतिहास, उसकी अष्टधातु की मजबूती और मारक क्षमता को लेकर बाकायदा रेकी भी की थी। पूर्व में भी इस क्षेत्र में किसी पुरानी तोप से विस्फोट के नाकाम प्रयास की बातें कही जा रही हैं, जिसके बाद मजबूत अष्टधातु वाली इस ऐतिहासिक तोप को निशाना बनाया गया।
🚜 आधा दर्जन जगहों पर सर्च ऑपरेशन जारी
मध्य प्रदेश पुलिस की टीम करौली पुलिस के साथ मिलकर गावड़ा मीणा गांव में डेरा डाले हुए है। तोप को जमीन में गाड़कर छिपाए जाने की आशंका के चलते जेसीबी (JCB) और मेटल डिटेक्टर्स की मदद से आधा दर्जन संदिग्ध स्थानों पर खुदाई की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इस अंतरराज्यीय गिरोह में 20 से 30 लोग शामिल हो सकते हैं।
❓ सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल
शिवपुरी पुलिस ने आरोपियों पर 10,000 रुपये का इनाम घोषित किया है। अधिकारियों का कहना है कि वे 'एंटीक तस्कर गिरोह' और 'बांध उड़ाने की साजिश' दोनों ही पहलुओं पर जांच कर रहे हैं। नरवर किले से तोप गायब होने की यह कोई पहली घटना नहीं है। करीब दो दशक पहले भी यहां से एक प्राचीन तोप चोरी हुई थी, जिसका आज तक पता नहीं चल सका है। 3.5 टन वजनी तोप को सुरक्षा घेरा तोड़कर ले जाना प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस पूरे मामले में करैरा एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने कहा, "ऐतिहासिक तोप चोरी के मामले में कई महत्वपूर्ण सुराग हमारे हाथ लगे हैं। हमने कुछ आरोपियों को पूछताछ के लिए डिटेन किया है। पूरी तहकीकात के बाद जल्दी ही किसी नतीजे पर पहुंचेंगे। तोप को बरामद करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।"
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