Morena News: महापौर की कार्यप्रणाली पर भड़के पार्षद, भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच MIC भंग; जानें पूरा विवाद
मुरैना नगर निगम में महापौर बनाम पार्षद विवाद गहराया। भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद MIC भंग, बीजेपी पार्षद बागी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट और ताजा अपडेट।
मुरैना। मुरैना नगर निगम में इन दिनों राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। महापौर शारदा सोलंकी की कार्यप्रणाली को लेकर न केवल विपक्षी दलों के, बल्कि सत्ताधारी दल बीजेपी के पार्षद भी मुखर हो गए हैं। पार्षदों ने महापौर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं और चंबल आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर लेखपाल की विवादास्पद नियुक्ति को निरस्त करने की मांग की है। पार्षदों के इस विरोध के बाद महापौर ने एमआईसी (MIC) को भंग करने का बड़ा फैसला लिया है।
⚖️ पार्षदों का आरोप: 'जनहित के लिए जारी रहेगा संघर्ष'
पार्षदों का कहना है कि उनकी लड़ाई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरी तरह से जनहित से जुड़ी है। पार्षद बदन सिंह यादव ने स्पष्ट किया कि लेखपाल की नियुक्ति और अन्य प्रशासनिक कार्यों में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर सभी दलों के पार्षद एक मंच पर आए हैं। उन्होंने कहा, "जनहित की बात उठाने के कारण यदि एमआईसी भंग की गई है, तो यह महापौर का निर्णय है, लेकिन हम जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करना जारी रखेंगे।"
🗣️ सुलह की कोशिश में बीजेपी नेतृत्व
पार्षदों के बागी तेवरों को देखते हुए बीजेपी कार्यालय में घंटों मंथन हुआ। जिला अध्यक्ष कमलेश कुशवाह ने कहा कि वे महापौर के साथ बैठकर मतभेदों को सुलझाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों की कार्यशैली में स्पष्टता होनी चाहिए। हालांकि, एमआईसी भंग किए जाने के अचानक लिए गए इस फैसले पर अभी भी संशय बना हुआ है।
🏛️ वरिष्ठ नेतृत्व पर टिकी निगाहें
विवाद इतना बढ़ चुका है कि अब नाराज पार्षद अपनी शिकायत लेकर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर तक पहुँचने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस, बसपा और निर्दलीय पार्षदों के साथ मिलकर बीजेपी के बागी पार्षदों का यह गठबंधन महापौर के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब पूरे मामले पर वरिष्ठ नेतृत्व के रुख का इंतजार है।
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