पेपर लीक और चयन परीक्षा में धांधली पर भड़के छात्र, सख्त कानून बनाने की मांग तेज
मध्य प्रदेश में भर्ती घोटालों, पेपर लीक और छात्र नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में युवा अब बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। NEYU ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
इंदौर: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं का विरोध प्रदर्शन भले ही फिलहाल समाप्त हो गया हो, लेकिन देश के युवाओं और छात्रों के मन में सुलग रहा रोष अभी भी शांत नहीं हुआ है। अब मध्य प्रदेश में परीक्षा माफियाओं के मकड़जाल, लगातार सामने आ रहे भर्ती घोटालों और चयन परीक्षाओं में हो रही भारी धांधली जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर राज्य के युवा एक बार फिर बड़े आंदोलन की राह पकड़ने जा रहे हैं। सोमवार को इंदौर में 'नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन' (NEYU) ने प्रेसवार्ता कर यह स्पष्ट किया है कि भले ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों की मांगों पर केंद्र सरकार ने सकारात्मक आश्वासन दे दिया हो, लेकिन इसके विपरीत मध्य प्रदेश में नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन से जुड़े जुझारू छात्र नेताओं और युवाओं के खिलाफ लगातार दमनकारी नीतियां अपनाई जा रही हैं। यूनियन का आरोप है कि राज्य सरकार अप्रत्यक्ष रूप से पेपर लीक करने वालों से लेकर भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और चयन प्रक्रिया में बड़े घोटाले करने वाले तत्वों को संरक्षण दे रही है।
📝 ठोस रणनीति बनाकर सड़कों पर उतरेंगे प्रदेश के युवा
युवाओं और छात्र नेताओं का कहना है कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार (इंटरव्यू) के अंकों में अत्यधिक और संदिग्ध अंतर के जरिए जानबूझकर मेरिट सूची को प्रभावित किया जाता है। इसके अलावा, बेरोजगार युवाओं से एक ही परीक्षा के लिए बार-बार आवेदन शुल्क वसूला जा रहा है, जो सरासर अन्याय है।
छात्रों की प्रमुख मांग है कि मध्य प्रदेश में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए एक बेहद सख्त और प्रभावी कानून बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही, सभी विभागों में नियमित और समयबद्ध भर्तियां सुनिश्चित करने के लिए भी पुख्ता कानूनी प्रावधान होने चाहिए। कॉलेज और विश्वविद्यालयों में होने वाली सभी शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाया जाए। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन को लेकर की गई घोषणाओं से छात्रों का कोई भला होने वाला नहीं है, ऐसा कहना मुश्किल है। यही वजह है कि छात्र नेता जल्द ही प्रशासन से विधिवत आंदोलन की अनुमति लेने के बाद एक बार फिर मैदान संभालने की तैयारी कर रहे हैं।
⚖️ मध्य प्रदेश में लगातार हो रहा है छात्र नेताओं का दमन
नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के प्रमुख नेता राधे जाट और छात्र नेता रंजीत किसानवंशी ने मीडिया के सामने तीखा दर्द बयां करते हुए कहा, ''दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए देश भर के छात्रों को तो रिहा कर दिया गया, लेकिन इसके उलट मध्य प्रदेश की पुलिस ने यहां शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन को कुचलने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। राज्य प्रशासन ने छात्र नेता राधे जाट, विजय चौधरी, सुरेंद्र यादव, चंद्रशेखर गुर्जर, गौरव परिहार और रमन गोस्वामी को पुलिस ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जिनकी बमुश्किल कानूनी औपचारिकताओं के बाद 26 जुलाई को रिहाई हो सकी है।'' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि बहुचर्चित 2023 के पटवारी भर्ती घोटाले की निष्पक्ष जांच के लिए सरकार द्वारा जिस 'राजेंद्र वर्मा समिति' का गठन किया गया था, उसकी रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
🔍 एक के बाद एक घोटाले, पर जिम्मेदार चेहरों पर कार्रवाई शून्य
छात्र नेताओं ने सरकार को आईना दिखाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में पिछले एक दशक से घोटालों की लंबी फेरिस्त रही है। साल 2013-14 का कुख्यात 'व्यापम घोटाला' हो या फिर इसके बाद सिलसिलेवार तरीके से हुआ चिकित्सा घोटाला, कृषि भर्ती घोटाला, टीईटी (TET) भर्ती घोटाला, नर्सिंग भर्ती घोटाला, वनरक्षक भर्ती घोटाला, पटवारी भर्ती घोटाला और आईटीआई/टीओ (ITI/TO) भर्ती घोटाला—इन सभी मामलों में हमेशा योग्य और पात्र छात्रों के साथ अन्याय हुआ है।
खासतौर पर आईटीआई टीओ भर्ती परीक्षा के परिणामों में तो हद ही हो गई, जब सागर परीक्षा केंद्र के एक ही सरनेम (उपनाम) वाले लगभग आधा दर्जन अभ्यर्थी सीधे टॉपर की सूची में शामिल होकर सामने आ गए। इस तरह के मामलों ने युवाओं का प्रतियोगी चयन परीक्षाओं से पूरा भरोसा ही उठा दिया है।
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