मध्य प्रदेश में जल्द बनेगा 31,000 करोड़ का नर्मदा प्रगति पथ, जानिए रूट और जिलों की पूरी जानकारी
मध्य प्रदेश में नर्मदा एक्सप्रेसवे (नर्मदा प्रगति पथ) का निर्माण प्रस्तावित है। 31 हजार करोड़ की इस 6-8 लेन परियोजना से छत्तीसगढ़ और गुजरात की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
सागर: भारत सरकार द्वारा देश की प्रमुख नदियों गंगा और यमुना के तर्ज पर आधुनिक एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जा रहा है, जिसके माध्यम से नदी किनारे बसे तमाम शहरों को शानदार और तेज सड़क कनेक्टिविटी हासिल होगी। इसी तर्ज पर मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा नदी के तट पर 'नर्मदा एक्सप्रेस-वे' का निर्माण प्रस्तावित किया गया है, जो एक अत्याधुनिक 6 से 8 लेन का नेशनल हाईवे होगा। नर्मदा नदी के किनारे बनने वाला यह नेशनल हाईवे मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से को आपस में जोड़ने का मुख्य कार्य करेगा। यह एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट होगा जो आगे चलकर गुजरात और छत्तीसगढ़ राज्यों को भी आपस में जोड़ेगा।
नर्मदा एक्सप्रेस-वे की यदि बात की जाए, तो मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के उद्गम स्थल से लेकर गुजरात सीमा में प्रवेश तक यह शानदार एक्सप्रेस-वे कुल 11 प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगा। इतना ही नहीं, यह एक्सप्रेस-वे देश के लगभग 30 नेशनल और स्टेट हाईवे से भी कनेक्ट होगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के इस प्रस्तावित नर्मदा एक्सप्रेसवे की कुल अनुमानित लागत लगभग 31,000 करोड़ रुपए आंकी गई है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को अब आधिकारिक रूप से 'नर्मदा प्रगति पथ' के नाम से जाना जाएगा। खास बात यह है कि इसमें हाल ही में कुछ तकनीकी बदलाव किए गए हैं और संभावना है कि इसकी फाइनल डीपीआर (DPR) जल्द ही सामने आ जाएगी।
📊 नर्मदा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं
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प्रोजेक्ट का स्वरूप: 6 से 8 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना
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मध्य प्रदेश में लंबाई: लगभग 906 किलोमीटर लंबा हिस्सा मध्य प्रदेश से गुजरेगा
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कुल प्रस्तावित मार्ग: लगभग 1,300 किलोमीटर लंबा रूट
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कनेक्टिविटी: गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़—इन तीन राज्यों को आपस में जोड़ेगा
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अनुमानित लागत: लगभग 31 हजार करोड़ रुपए
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भविष्य का विस्तार: भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे 8 लेन तक विस्तारित किया जाएगा
🗺️ नर्मदा एक्सप्रेसवे का प्रस्तावित रूट और मार्ग
यह एक्सप्रेसवे सभी प्रमुख शहरों, धार्मिक व ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों के साथ-साथ कई जिला मुख्यालयों को भी आपस में जोड़ने का काम करेगा।
यह रूट कबीर चबूतरा (अमरकंटक) से अपनी शुरुआत करते हुए डिंडोरी, जबलपुर, ओबेदुल्लागंज, बुधनी, नसरुल्लागंज, संदलपुर, करनाड, इंदौर, धार और सरदारपुर-झाबुआ (मध्य प्रदेश/गुजरात सीमा) तक मध्य प्रदेश की सीमा के भीतर से गुजरेगा।
🛣️ किन-किन जिलों और नेशनल हाईवे से होगी कनेक्टिविटी?
नर्मदा प्रगति पथ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नर्मदा किनारे के तमाम शहरों और कस्बों से गुजरने के कारण इसकी कनेक्टिविटी देश के करीब 30 बड़े नेशनल हाईवे से हो जाएगी।
यह एक्सप्रेस-वे अनूपपुर, जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडोरी, खंडवा, हरदा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर और होशंगाबाद जैसे जिलों से गुजरते हुए कई प्रमुख मार्गों से जुड़ेगा। हालांकि इसका फाइनल मैप अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन योजना के मुताबिक यह अमरकंटक, मंडला, डिंडोरी, जबलपुर, शाहपुरा, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, खिरकिया, हरदा, हरसूद, खंडवा, मुंडी, सनावद, बरवाहा, ओंकारेश्वर, महेश्वर, बड़वानी और अलीराजपुर के विभिन्न क्षेत्रों से होकर निकलेगा।
⛽ यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए जाएंगे सार्वजनिक सुविधा केंद्र
नर्मदा किनारे बन रहे इस एक्सप्रेस-वे के माध्यम से पर्यटन और माल परिवहन (Logistics) में भारी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जिसके चलते यह कई बड़े कस्बों और शहरों के करीब से गुजरेगा।
इन तमाम जगहों पर यात्रा करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक 'सार्वजनिक सुविधा केंद्र' स्थापित किए जाएंगे। नर्मदा एक्सप्रेसवे के किनारे कई नए पेट्रोल पंप, पुलिस चौकियां, आधुनिक रेस्टोरेंट, भोजनालय, बस स्टैंड, विश्राम गृह (लॉज), होटल और सार्वजनिक शौचालय बनाए जाने का पूरा प्रस्ताव तैयार किया गया है।
📈 पर्यटन, औद्योगिक विकास और रियल एस्टेट को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
नर्मदा प्रगति पथ विशेष रूप से मध्य प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र, औद्योगिक विकास और रियल एस्टेट कारोबार के लिए एक बड़ा वरदान साबित होने वाला है।
भारतमाला परियोजना के अंतर्गत निर्मित होने वाला यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश के नर्मदा तट वाले जिलों और कस्बों की छत्तीसगढ़ और गुजरात के साथ बेहतरीन कनेक्टिविटी स्थापित करेगा। इसके किनारों पर नई औद्योगिक इकाइयां और लॉजिस्टिक हब आकार लेंगे। नर्मदा नदी से जुड़े तमाम धार्मिक व पर्यटन क्षेत्रों तक पहुंच बेहद आसान हो जाएगी, जिससे पर्यटन को और अधिक विस्तार मिलेगा। साथ ही, नर्मदा किनारे के शहरों में जमीनों और रियल एस्टेट कारोबार में भी तेजी आएगी। गुजरात से सीधी कनेक्टिविटी स्थापित होने के कारण राज्य में नए औद्योगिक निवेश और रोजगार के ढेरों अवसर पैदा होने की पूरी उम्मीद है।
📋 नर्मदा एक्सप्रेसवे की अब तक की सिलसिलेवार प्रगति
मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री राकेश सिंह का कहना है कि, "जहाँ तक नर्मदा एक्सप्रेसवे परियोजना का सवाल है, अब यह योजना आधिकारिक रूप से 'नर्मदा प्रगति पथ' के नाम से जानी जाएगी।"
यह योजना मूल रूप से मई 2020 में प्रस्तावित की गई थी। इसके बाद साल 2021 में योजना के मध्य प्रदेश से गुजरने वाले हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आधिकारिक मंजूरी मिली। फरवरी 2022 में तैयार की गई संशोधित योजना के तहत मध्य प्रदेश में 906 किलोमीटर लंबे हिस्से के निर्माण को औपचारिक रूप से हरी झंडी दे दी गई।
फिलहाल नर्मदा प्रगति पथ के रूट में आवश्यक बदलाव के साथ इसकी फाइनल डीपीआर तैयार करने का कार्य तेजी से चल रहा है। हालांकि, इसके लिए भूमि अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया अभी शुरू होना बाकी है, जिसके पूरा होने के बाद आगे टेंडर (निविदा) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से मध्य प्रदेश की परिवहन व्यवस्था और राज्य की समग्र कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा।
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