मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता पारस चंद्र जैन का 76 वर्ष की आयु में निधन
मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मंत्री पारस चंद्र जैन का 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनका इंदौर में इलाज चल रहा था। जानिए उनके राजनीतिक सफर के बारे में।
उज्जैन: मध्य प्रदेश की राजनीति से एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, दिग्गज और मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री पारस चंद्र जैन का 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनके इस असमय निधन की खबर से पूरे प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। पारस चंद्र जैन मध्य प्रदेश की सक्रिय राजनीति में लंबे समय तक शीर्ष पर रहे हैं और अपने लंबे राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारियां संभाली हैं। पिछले कुछ समय से वे अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की आधिकारिक जानकारी उज्जैन जिला मीडिया प्रभारी दिनेश जाटवा और उनके पीए शुभम माली द्वारा दी गई है।
🏥 इंदौर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था उपचार
पूर्व मंत्री पारस चंद्र जैन पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे, जिसके चलते उनका इलाज इंदौर के एक निजी अस्पताल में करवाया जा रहा था।
चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद, सोमवार, 3 अगस्त को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को उज्जैन लाया गया है, जहाँ उन्हें अंतिम विदाई दी जा रही है। पारस चंद्र जैन की अंतिम यात्रा उनके निज निवास स्थान से शुरू होकर चक्रतीर्थ शमशान घाट के लिए 3 अगस्त को दोपहर 2 बजे प्रस्थान करेगी, जहाँ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
🏛️ उज्जैन उत्तर विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रहे पारस जैन
पारस चंद्र जैन का जन्म 20 जून 1950 को उज्जैन में हुआ था। उनके पिता का नाम स्वर्गीय समरथमल तलेरा, माता का नाम कैलाश बाई, पत्नी का नाम अंगूरबाला जैन और बच्चों में पुत्रियां स्वाति मोगरा व संध्या तलेरा हैं। उनके पिता मूल रूप से अनाज का व्यवसाय करते थे।
पारस चंद्र जैन उज्जैन की महत्वपूर्ण उत्तर विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक चुने गए थे। उन्होंने वर्ष 1990 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर अपने विधायी सफर की शुरुआत की थी। हालांकि, पार्टी द्वारा वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया था।
🎓 एबीवीपी और आरएसएस से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर
पारस चंद्र जैन का शुरुआती राजनीतिक जीवन छात्र राजनीति के दौर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) संगठन से शुरू हुआ था। इसके साथ ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और स्काउट गाइड जैसी संस्थाओं से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे।
उनकी उच्च शिक्षा उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से संपन्न हुई थी। एक जमीनी और सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में उनकी कार्यशैली ने उन्हें 1990 में पहला विधानसभा चुनाव जितवाया और वे उज्जैन उत्तर क्षेत्र से भाजपा के विधायक बने। विपक्षी दलों और कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान भी पारस जैन ने एक मुखर और लोकप्रिय विधायक की भूमिका निभाई, क्योंकि वे हमेशा सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर सक्रिय रहते थे और आम जनता के बीच उनकी छवि बेहद मिलनसार और मजबूत थी।
🤼 'पहलवान' के नाम से लोकप्रिय रहे और संभाले कई बड़े मंत्रालय
पारस चंद्र जैन को राजनीतिक हलकों में 'पहलवान' के नाम से भी जाना जाता था, जिसके पीछे मुख्य कारण यह था कि वे शुरू से ही व्यायाम, कसरत, खेलकूद और योग जैसी शारीरिक गतिविधियों से जुड़े रहे थे। अखाड़ों में कुश्ती लड़ना भी उनके शौक में शामिल था।
वे साल 2005 से 2013 तक मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में वन विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में राज्य मंत्री के रूप में कार्य कर चुके थे। इसके बाद, दिसंबर 2013 में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया और वर्ष 2016 में उन्हें ऊर्जा मंत्री की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई।
🗳️ वर्ष 2023 में नहीं मिला था टिकट, बावजूद इसके पार्टी में रहे सक्रिय
भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पारस चंद्र जैन को टिकट नहीं दिया था, और उनकी जगह उज्जैन उत्तर से अनिल जैन कालूहेड़ा को उम्मीदवार बनाया गया था।
टिकट न मिलने के बावजूद पारस जैन ने एक निष्ठावान और सक्रिय कार्यकर्ता की तरह पार्टी के प्रति अपनी वफादारी निभाई और संघ तथा स्काउट गाइड के माध्यम से सामाजिक व संगठनात्मक कार्यों में अपनी भूमिका निभाते रहे। उनके निधन पर भाजपा के तमाम वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और उनके परिवारजनों ने गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
⚖️ अपने कार्यकाल के दौरान विवादों से भी रहा था नाता
पूर्व मंत्री पारस चंद्र जैन का राजनीतिक जीवन जहां एक तरफ उपलब्धियों से भरा रहा, वहीं दूसरी तरफ उनका नाम कुछ विवादों से भी जुड़ा रहा।
उनके खिलाफ पूर्व में भ्रष्टाचार का एक मामला भी दर्ज हुआ था, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन विधायक पारस चंद्र जैन ने लोक निर्माण विभाग से अपनी विधायक निधि की करोड़ों रुपए की राशि अपने निजी हितों के लिए स्वीकृत करवाई थी। उन पर अधिकारियों के साथ मिलकर अपने पद के दुरुपयोग का आरोप था। लोकायुक्त उज्जैन द्वारा पूर्व मंत्री सहित 8 नामजद लोगों और अन्य के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1)ए, 13(2) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120बी के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था।
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