भोपाल के काजी कैंप में वर्षों पुरानी दुकानें टूटने से रोजी-रोटी का संकट, स्थानीय लोगों ने जताया विरोध

भोपाल के काजी कैंप इलाके में मेट्रो स्टेशन निर्माण के लिए पुरानी दुकानें और मकान तोड़े जाने का विरोध शुरू हो गया है। व्यापारियों को कम मुआवजा मिलने और रोजी-रोटी छिनने का डर है।

Aug 03, 2026 - 19:53
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भोपाल के काजी कैंप में वर्षों पुरानी दुकानें टूटने से रोजी-रोटी का संकट, स्थानीय लोगों ने जताया विरोध

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पुराने शहर के काजी कैंप इलाके में मेट्रो स्टेशन के निर्माण को लेकर स्थानीय व्यापारियों और रहवासियों का विरोध अब तेजी से उग्र होता जा रहा है। स्थिति यह है कि कई प्रभावित दुकानों और मकानों के बाहर विरोधस्वरूप बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर लगा दिए गए हैं। सोमवार से प्रशासन द्वारा दुकानों और मकानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। काजी कैंप में मेट्रो स्टेशन के निर्माण के चलते यहाँ की वर्षों पुरानी दुकानें तोड़ी जानी शुरू हो गई हैं, जिसके बाद से दुकानदारों और उनके परिवारों के बीच अपनी रोजी-रोटी और सिर से छत छिनने (आशियाने) को लेकर भारी चिंता और बेचैनी बढ़ने लगी है।

💰 बेहद कम मुआवजा मिलने से स्थानीय लोगों में फूटा रोष

इस पूरी कार्रवाई से आहत स्थानीय लोगों का कहना है कि वे किसी भी विकास कार्य या मेट्रो परियोजना के विरोधी नहीं हैं, लेकिन इस प्रोजेक्ट की वजह से उनकी पीढ़ियों पुरानी दुकानें और घर उजड़ रहे हैं, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी और रहने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

क्षेत्र के व्यापारी प्यारे खान, बादशाह खान और सईद खान ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि, "यहाँ की दुकानें और मकान 80 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। हमने अपनी जिंदगी की गाढ़ी कमाई और सालों की कड़ी मेहनत से इस कारोबार को खड़ा किया है, और आज हमारा पूरा परिवार इसी पर निर्भर है।" उनका आरोप है कि प्रशासन द्वारा उन्हें जो मुआवजा दिया गया है, वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान यानी न के बराबर है। सरकार की तरफ से केवल एक लाख से डेढ़ लाख रुपए तक का मुआवजा दिया गया है, जबकि इस मामूली राशि से किसी भी सूरत में नए सिरे से अपना कारोबार या मकान दोबारा खड़ा करना पूरी तरह असंभव है।

🍽️ परिवार का पालन-पोषण करना हुआ मुश्किल, अधिकारियों ने साधी चुप्पी

दुकानें और मकान हटाए जाने के बाद कई प्रतिष्ठित व्यापारी अचानक सड़क पर आ गए हैं, और अब उनके सामने अपने परिवार का भरण-पोषण करना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।

रहवासियों का कहना है कि कई परिवार इस इलाके में दशकों से पीढ़ियों से रह रहे हैं। उनके लिए यह घर केवल ईंट-पत्थर की कोई संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी जीवनभर की यादों, संघर्षों और भावनाओं का एक अहम हिस्सा है। जब इस गंभीर मामले को लेकर मेट्रो परियोजना के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो वे मौके पर नहीं मिले, और जो अधिकारी मिले भी उन्होंने इस पर किसी भी तरह की बात करने से साफ इनकार कर दिया।

😨 अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन और ब्लू लाइन कॉरिडोर को लेकर भय का माहौल

अब स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी और मुख्य चिंता यह है कि अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन और ब्लू लाइन कॉरिडोर के दायरे में आने वाली अन्य पुरानी इमारतों, रिहाइशी मकानों और व्यावसायिक दुकानों पर भी कभी भी बुलडोजर चल सकता है।

इस अनिश्चितता के चलते प्रभावित परिवारों के मन में भविष्य को लेकर गहरा असमंजस और डर का माहौल बना हुआ है। पूरे इलाके में मानो एक प्रकार का मातम सा छाया हुआ है। इन पीड़ित परिवारों को अब समझ नहीं आ रहा है कि वे इस विकट परिस्थिति में क्या कदम उठाएं, कहाँ जाएं और अपने परिवार का पेट कैसे पालें।

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