स्टूडेंट्स से मुखातिब हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बोले- अनुशासन बनाए रखने के लिए थोड़ा बुरा बनना पड़ता है
भोपाल के कमला नेहरू सांदीपनि स्कूल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छात्रों से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने चैटजीपीटी के इस्तेमाल, तनाव प्रबंधन और राजनीति जैसे कई विषयों पर रोचक जवाब दिए।
भोपाल: हमेशा प्रशासनिक बैठकों में अधिकारियों से कड़े सवाल-जवाब करने वाले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक अलग ही अंदाज में तब दिखना पड़ा जब उन्हें स्कूली स्टूडेंट्स के तीखे और रोचक सवालों का सामना करना पड़ा। मौका था प्रदेश की राजधानी भोपाल के कमला नेहरू सांदीपनि स्कूल में आयोजित एक विशेष छात्र संवाद कार्यक्रम का, जहाँ मुख्यमंत्री ने स्कूल के बच्चों के साथ खुलकर चर्चा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्कूल की स्टूडेंट कैबिनेट से बातचीत करते हुए एक मजेदार बात कही कि "स्कूल में अनुशासन बनाए रखने के लिए कभी-कभी थोड़ा बुरा भी बनना पड़ता है।"
छात्रों के एक सवाल के जवाब में सीएम ने हैरान करने वाला खुलासा करते हुए कहा कि वे किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में जाने से पहले उसके विषय के बारे में 'चैटजीपीटी' (ChatGPT) पर जरूर सर्च करते हैं। साथ ही उन्होंने स्टूडेंट्स को नसीहत दी कि तकनीक का इस्तेमाल हमेशा आंखें खोलकर और समझदारी के साथ करना चाहिए।
🤝 "मैं भी आपका भाई हूँ, सरकारी स्कूल से पढ़कर निकला हूँ"—सीएम मोहन
स्कूल के बच्चों के साथ संवाद के दौरान सीएम मोहन यादव ने बड़े अपनेपन से कहा कि, "मैं भी आप ही का भाई हूँ और मैं भी एक साधारण सरकारी स्कूल से पढ़कर ही निकला हूँ।"
यह बात अलग है कि तब स्कूल इतने आधुनिक नहीं थे। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि हमारी मजबूत शिक्षा व्यवस्था की वजह से हमें पूरी दुनिया में मान-सम्मान मिलता है। मुख्यमंत्री ने समझाया कि दुनिया में ऐसे कई देश हैं जो बहुत अधिक धन संग्रह करना जानते हैं और अपनी ताकत के बल पर जीना जानते हैं, लेकिन इस तरह कोई भी देश लंबे समय तक नहीं टिक सकता। कोई भी राष्ट्र अपने मूल संस्कारों और अपनी जीवन की अच्छाइयों के दम पर ही आगे बढ़ता है।
🏛️ स्कूल के मिनिस्टर्स से की चर्चा, डिसिप्लिन मिनिस्टर से पूछे सवाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्कूल में आकर उन्हें पता चला कि यहाँ बच्चों की अपनी एक 'स्टूडेंट कैबिनेट' भी है, ठीक वैसे ही जैसे हमारी अपनी मंत्रिपरिषद होती है।
इसके बाद सीएम ने स्कूल के सभी स्टूडेंट मिनिस्टर्स को मंच पर बुलाया और उनसे लंबी बातचीत की। इस दौरान स्कूल की 'डिसिप्लिन मिनिस्टर' शालिनी ने बताया कि वह स्कूल में पूरा अनुशासन बनाकर रखती हैं और सभी बच्चे बहुत अच्छे हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने हंसते हुए कहा कि फिर तो स्कूल के बच्चे आपसे नाराज रहते होंगे, क्योंकि अनुशासन कायम करने के लिए कभी-कभी थोड़ा सख्त या बुरा बनना ही पड़ता है। जब सीएम ने पूछा कि क्या कोई मिनिस्टर खराब काम करे तो उसे हटाने का नियम है, तो बच्चों ने बताया कि हर मंत्री को एक साल के लिए चुना जाता है।
🎯 "राजनीति और खेती-किसानी में कौन आना चाहता है?"—मुख्यमंत्री का सवाल
बच्चों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने एक बड़ा सामाजिक सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि पढ़ाई के बाद हर कोई डॉक्टर, इंजीनियर या सीएम बनना चाहता है, लेकिन सेना में कौन-कौन जाना चाहता है?
इसके बाद उन्होंने पूछा कि कितने बच्चे ऐसे हैं जिनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि खेती-किसानी से जुड़ी है और वे पढ़ाई के बाद कृषि क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं? इस सवाल पर केवल एक ही छात्रा ने अपना हाथ उठाया। इस पर सीएम ने चिंता जताते हुए कहा कि यही आज हमारे समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
उन्होंने यह भी पूछा कि आप में से चुनाव कौन लड़ना चाहता है? बहुत कम हाथ उठने पर मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि यदि युवा राजनीति से दूर रहेंगे तो ऐसे में हमारा लोकतंत्र जिंदा कैसे रहेगा। उन्होंने कहा कि हम सब पढ़-लिखकर केवल अच्छे नागरिक ही नहीं बनना चाहते, बल्कि हमें अपने देश और प्रदेश की बागडोर संभालने के लिए भी आगे आना होगा।
🤖 "चैटजीपीटी का उपयोग करो, लेकिन आंखें खोलकर"—मुख्यमंत्री की सलाह
कार्यक्रम के दौरान छात्रा प्रिंसी विश्वकर्मा ने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल किया कि क्या आप चैटजीपीटी का उपयोग करते हैं और उसमें क्या सर्च करते हैं?
इसके जवाब में सीएम मोहन यादव ने कहा कि, "हाँ, मैं चैटजीपीटी का उपयोग करता हूँ। जब भी मुझे किसी कार्यक्रम में जाना होता है, तो मैं उससे जुड़े विषयों के बारे में जानकारी सर्च करता हूँ। लेकिन चैटजीपीटी जो भी जानकारी देता है, वह शत-प्रतिशत संपूर्ण नहीं होती। कई बार जब हम उसे सही आंकड़े या तथ्य बताते हैं, तो वह भी अपनी गलती मानकर 'सॉरी' बोलता है और नए तथ्य देता है। इसलिए चैटजीपीटी का उपयोग हमेशा आंखें खोलकर और उसके आंकड़ों को वेरिफाई करके ही करना चाहिए।"
एक अन्य छात्रा लारा खत्री ने पूछा कि क्या आप इंस्टाग्राम का उपयोग करते हैं और किसे फॉलो करते हैं? इस पर सीएम ने मुस्कुराते हुए कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करना ही पड़ता है, और वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई महत्वपूर्ण विषयों और हस्तियों को फॉलो करते हैं।
🧘 "तनाव पालने से बढ़ता है, मैं व्यायाम और म्यूजिक से दूर करता हूँ तनाव"
छात्रा आकांक्षा सेन ने एक बहुत ही व्यावहारिक सवाल पूछते हुए कहा कि आप इतने बड़े और घनी आबादी वाले प्रदेश को संभालते हैं, ऐसे में जब आप तनाव में रहते हैं तो उसे कैसे दूर करते हैं?
मुख्यमंत्री ने बहुत ही सरल शब्दों में जवाब दिया कि "तनाव को पालने से तनाव हमेशा बढ़ता है।" हम जो भी काम करते हैं, उसके लिए अपना माइंडसेट पहले से तय करना पड़ता है और आने वाली चुनौतियों के लिए हमेशा तैयार रहना पड़ता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई गाड़ी चलाता है और अचानक सामने कोई आ जाता है, तो गाड़ी तुरंत एक्शन लेकर अपनी गति बढ़ा देती है। सीएम ने अपनी दिनचर्या साझा करते हुए बताया कि वे नियमित रूप से व्यायाम करते हैं, संगीत सुनते हैं और रात में कब सोना है इसका एक पक्का टाइम-टेबल भी तय रखते हैं।
🚌 सांदीपनि स्कूलों के बच्चों के लिए जल्द होगा बसों का इंतजाम
मीडिया से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आगे बताया कि उन्होंने आज सांदीपनि स्कूल की सभी कक्षाओं, लैब्स और पूरे परिसर का बारीकी से निरीक्षण किया है और बच्चों से बहुत सकारात्मक चर्चा की है।
उन्होंने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में जो निवेश किया जा रहा है, वही हमें कल के एक सक्षम और विकसित मध्य प्रदेश की ओर ले जाएगा। प्रदेश में स्कूलों का ड्रॉप-आउट रेट अब शून्य हो गया है और बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट लिस्ट में अधिकांश बच्चे सरकारी स्कूलों से ही निकलकर आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि प्रदेश के सांदीपनि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के सुरक्षित परिवहन के लिए जल्द ही बसों की व्यवस्था की जाएगी। पूरे प्रदेश में स्कूलों की आधारभूत गुणवत्ता को सुधारने के लिए भवनों का कायाकल्प किया जा रहा है और शिक्षकों को आधुनिक प्रशिक्षण भी लगातार दिया जा रहा है।
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