मध्य प्रदेश में अब हर शुक्रवार 'फील्ड वाला फ्राइडे', सीधे जनता के द्वार जाएंगे अधिकारी

मध्य प्रदेश सरकार ने जनता की समस्याओं के समाधान के लिए 'फील्ड वाला फ्राइडे' अभियान शुरू किया है। इसके तहत अधिकारी हर शुक्रवार फील्ड पर रहकर योजनाओं की मॉनिटरिंग करेंगे।

Aug 06, 2026 - 12:28
0
मध्य प्रदेश में अब हर शुक्रवार 'फील्ड वाला फ्राइडे', सीधे जनता के द्वार जाएंगे अधिकारी

भोपाल : मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने प्रशासनिक कामकाज और जनसुनवाई व्यवस्था को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और अभिनव पहल की है। अब से प्रदेश में हर सप्ताह का शुक्रवार 'फील्ड वाला फ्राइडे' (Field Wala Friday) के रूप में मनाया जाएगा। दरअसल, इस विशेष अभियान के तहत सरकार अब सीधे जनता के द्वार पहुँचेगी और आम नागरिकों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जाएगा। आगामी 7 अगस्त से शुरू हो रहा यह महत्वाकांक्षी अभियान लगातार पाँच महीने यानी 8 जनवरी 2027 तक पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा। इस दौरान आम लोगों की शिकायतों के त्वरित निराकरण के साथ-साथ संचालित हो रही विभिन्न जनहितकारी योजनाओं की जमीनी स्तर पर कड़ी मॉनिटरिंग भी की जाएगी।

📋 सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने जारी किए सख्त निर्देश

इस नई व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने प्रदेश के सभी प्रमुख विभागाध्यक्षों के अलावा तमाम जिलों के कलेक्टर्स और कमिश्नर्स को आवश्यक दिशा-निर्देश पहले ही जारी कर दिए हैं।

तय किया गया है कि अब हर हफ्ते का पाँचवा दिन यानी शुक्रवार पूरी तरह से 'फील्ड वाला फ्राइडे' ही होगा। इसके साथ ही सीएम हेल्पलाइन से जुड़े लंबित मामलों को जल्द से जल्द निपटाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं, और सभी अधिकारियों को यह भी ताकीद की गई है कि वे प्रशासनिक दौरों के दौरान कम से कम खर्च करें और वाहनों की पूलिंग (Vehicle Pooling) कर फील्ड पर निकलें।

🚶‍♂️ मैदान पर रहेंगे सभी अधिकारी, शुक्रवार को पूरी तरह रद्द रहेंगी बैठकें

सात अगस्त से शुरू हो रहे इस अनूठे अभियान के तहत प्रत्येक सप्ताह के शुक्रवार को सभी जिम्मेदार अधिकारी अपने कार्यालयों में बैठने के बजाय सीधे मैदानी इलाकों में मौजूद रहेंगे।

इस विशेष 'जन विश्वास अभियान' के दिन किसी भी विभागाध्यक्ष, कलेक्टर या कमिश्नर स्तर के अधिकारी की किसी भी प्रकार की ऑनलाइन या ऑफलाइन रिव्यू मीटिंग (समीक्षा बैठक) आयोजित नहीं की जाएगी। हालांकि, अधिकारियों को यह प्रशासनिक छूट जरूर दी गई है कि वे अपने जिले या क्षेत्र का चुनाव अपनी प्रशासनिक सुविधा, विभागीय आवश्यकता और स्थानीय प्राथमिकताओं के आधार पर कर सकें।

इसके साथ ही अधिकारियों को यह भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी अपरिहार्य कारणवश कोई अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या सचिव स्तर का अधिकारी फील्ड पर न जा सके, तो इसकी पूर्व सूचना मुख्य सचिव कार्यालय को अनिवार्य रूप से देनी होगी। यही नियम सभी प्रमुख विभागाध्यक्षों पर भी समान रूप से लागू रहेगा।

🎯 सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई के मामलों पर रहेगा विशेष फोकस

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में इस बात पर जोर दिया गया है कि यह सभी विभागों की मुख्य जवाबदेही है कि वे हर सप्ताह अपने-अपने विभाग से संबंधित सी.एम. हेल्पलाइन, जनसुनवाई और लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत आने वाले प्रकरणों की गहन समीक्षा करें।

अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बिना किसी ठोस वजह के कोई भी शिकायत लंबे समय तक पेंडिंग न रहे। तय की गई समय-सीमा (Deadlines) के भीतर ही सभी मामलों का संतुष्टिपूर्ण निराकरण हो जाना चाहिए।

विभाग के जो प्रमुख विभागाध्यक्ष कार्यालय हैं, उन्हें भी यह निर्देश दिए गए हैं कि संभाग स्तर पर पदस्थ अपर संचालक और संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी भी अनिवार्य रूप से अपने अधीन आने वाले जिलों का दौरा करें, विभागीय कार्यों की समीक्षा करें और मैदानी स्तर पर जाकर हकीकत की पड़ताल करें।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User