सरकारी क्लर्क सुभाष मिश्रा के ठिकानों पर छापा, आय से 5 गुना अधिक 5 करोड़ की संपत्ति का खुलासा
मध्य प्रदेश के जबलपुर में लोकायुक्त पुलिस ने एक सरकारी बाबू के ठिकानों पर छापा मारकर 5 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध संपत्ति का खुलासा किया है।
जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर और सिवनी क्षेत्र से एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जहाँ एक सरकारी बाबू की वैध सैलरी और उसकी कुल संपत्ति के बीच भारी अंतर मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने बेहद सख्त कार्रवाई की है। सिवनी जिले के क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज प्रशिक्षण केंद्र में बतौर क्लर्क (बाबू) पदस्थ सुभाष मिश्रा पर उनकी आय से लगभग 5 गुना अधिक संपत्ति अवैध रूप से जमा करने का गंभीर आरोप है। लोकायुक्त की टीम ने एक साथ कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमार कार्रवाई करते हुए करीब 5 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति का खुलासा किया है, और फिलहाल आगे की जाँच व कार्रवाई अभी भी जारी है।
💰 वैध आय से 5 गुना अधिक निकली संपत्ति
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, आरोपी सुभाष मिश्रा सिवनी जिले के उक्त प्रशिक्षण केंद्र में ग्रेड-2 क्लर्क के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे थे। लोकायुक्त की टीम ने शनिवार को उनके जबलपुर स्थित त्रिपुरी चौक वाले मकान पर अचानक छापा मारा। इस कार्रवाई के संबंध में जानकारी देते हुए लोकायुक्त पुलिस की डीएसपी रेखा प्रजापति ने बताया कि, "हमें पुख्ता शिकायत मिली थी कि सुभाष मिश्रा ने अपनी वैध आय से कई गुना अधिक संपत्ति अर्जित कर रखी है।"
📍 एक साथ कई स्थानों पर लोकायुक्त की ताबड़तोड़ छापेमारी
डीएसपी रेखा प्रजापति ने आगे बताया कि मिली हुई शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने सुभाष मिश्रा के कुल पाँच अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ एक ही समय में छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया। इसमें जबलपुर का त्रिपुरी स्थित मकान, पाटन का एक आलीशान फॉर्म हाउस, तथा सिवनी स्थित उनका मकान और सरकारी दफ्तर शामिल हैं, जहाँ वे वर्तमान में पदस्थ थे। इसके अलावा दो अन्य ठिकानों पर भी पुलिस की टीमें लगातार जाँच-पड़ताल कर रही हैं।
⚖️ भ्रष्टाचार के जरिए की गई अवैध कमाई का खुलासा
लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि शनिवार सुबह से शुरू हुई इस लंबी कार्रवाई में अब तक सुभाष मिश्रा के पास 5 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति का आधिकारिक तौर पर खुलासा हो चुका है। नियम और सर्विस रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी की पूरी नौकरी के दौरान कुल वैध आय लगभग एक करोड़ रुपए होनी चाहिए थी, लेकिन इसके विपरीत उनके पास 5 करोड़ रुपए से ज्यादा की अकूत संपत्ति पाई गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भ्रष्टाचार के जरिए यह अवैध कमाई की है।
📝 पत्नी शीला मिश्रा के नाम पर खरीदी गई थी अधिकांश संपत्तियाँ
जाँच के दौरान यह भी सामने आया है कि सुभाष मिश्रा ने अपनी इस अवैध कमाई से कई बड़े प्लॉट, दो आलीशान मकान और जमीन के तमाम दस्तावेज खरीद रखे थे। हैरानी की बात यह है कि उन्होंने अपनी अधिकांश संपत्ति खुद के बजाय अपनी पत्नी शीला मिश्रा के नाम पर दर्ज करवा रखी थी। लोकायुक्त पुलिस का यह भी दावा है कि अभी दस्तावेजों और बैंक खातों की छानबीन जारी है, इसलिए आने वाले समय में इससे भी अधिक संपत्ति के खुलासे की पूरी संभावना है, जिसकी विस्तृत जानकारी पूरी जाँच पूरी होने के बाद सामने आएगी।
सवाल यह भी उठ रहा है कि जब एक ग्रेड-2 क्लर्क के पास करोड़ों की संपत्ति थी और उसके विभाग के लोगों को इसकी भनक थी, तो अब तक विभागीय स्तर पर उसे क्यों नहीं रोका गया?
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