कागजों में बन गया खेत में तालाब, किसान बोला- अधिकारी मेरा तालाब ढूंढकर लाएं
टीकमगढ़ जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहाँ कागजों में तालाब बन गया लेकिन जमीन पर उसका अस्तित्व ही नहीं है। जानिए क्या है पूरा मामला।
टीकमगढ़: मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से एक बेहद अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक गरीब किसान ने जिला प्रशासन के सामने गुहार लगाई है कि उसका आधिकारिक तालाब चोरी हो गया है। अब आपके मन में भी यह सवाल उठ रहा होगा कि भला कोई तालाब कैसे चोरी हो सकता है? लेकिन यह मामला पूरी तरह ऐसा ही है। सरकारी कागजों और दस्तावेजों के मुताबिक किसान के खेत में तालाब का निर्माण हो चुका है, उसकी लागत भी पूरी तरह तय है और मस्टर रोल भी दर्ज किया जा चुका है। अब उस कागजी तालाब का मालिक किसान अधिकारियों के चक्कर काटकर अपना तालाब उसे वापस दिलाने या ढूंढकर देने की गुहार लगा रहा है।
🔍 जाँच टीम के अजीबोगरीब सवाल सुनकर दंग रह गया किसान
यह पूरा मामला पलेरा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत 'स्यावनी' का है। ग्राम पंचायत स्यावनी के रहने वाले किसान चतुर कुशवाहा मजदूरी करने के सिलसिले में दिल्ली गए हुए थे। कुछ दिन पहले जब वे वापस अपने गाँव लौटे, तो जनपद पंचायत पलेरा की एक जाँच टीम उनके घर पहुँच गई और उनसे सीधा सवाल किया कि, "आपके खेत में जो सरकारी तालाब बना है, वह इस समय कहाँ है?" यह सवाल सुनकर किसान खुद भौंचक्का रह गया, क्योंकि उसे तो यह पता ही नहीं था कि उसके खेत में कोई तालाब बनना भी था, और हकीकत यह थी कि उसके खेत में आज तक ऐसा कोई निर्माण हुआ ही नहीं था।
इसके बाद जाँच टीम किसान के साथ उसके खेत पर पहुँची, जहाँ मौके की जमीनी स्थिति देखने के बाद एक पंचनामा तैयार किया गया। जाँच टीम की शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई कि किसान चतुर कुशवाहा के नाम पर गत 26 अप्रैल 2025 को एक 'खेत तालाब' स्वीकृत किया गया था। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इस योजना की कुल लागत 1 लाख 47 हजार 621 रुपए निर्धारित की गई थी और रिकॉर्ड में मस्टर रोल भी बाकायदा दर्ज था। लेकिन पीड़ित किसान का साफ तौर पर दावा है कि जमीन पर तालाब के नाम पर एक ईंट या गड्ढा तक नहीं खोदा गया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जमीन पर तालाब बना ही नहीं, तो फिर सरकारी रिकॉर्ड में इसका निर्माण कैसे और किसकी शह पर दर्ज हो गया?
🌙 आधी रात को पड़ोसी के खेत में जेसीबी से खुदवा दिया तालाब
वहीं दूसरी ओर, पीड़ित किसान चतुर कुशवाहा अब जिला प्रशासन के अधिकारियों से लगातार गुहार लगा रहा है कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में मेरा तालाब बन चुका है, तो उसे जमीन पर खोजकर मुझे दिलाया जाए। जब यह पूरा अजीब मामला मीडिया के संज्ञान में आया, तो अपनी पोल खुलते देख गाँव के सरपंच और सचिव ने आनन-फानन में हरकत दिखाते हुए घटना से तीन दिन पहले आधी रात के समय एक जेसीबी मशीन भेजकर खेत में तालाब खुदवाने का प्रयास किया।
लेकिन रात के अंधेरे और हड़बड़ी के कारण जो तालाब खोदा गया, वह पीड़ित चतुर कुशवाहा के खेत में न होकर उनके पड़ोसी किसान सीताराम पाल के खेत में खुद गया। आज भी सामने आई तस्वीरों में आप जमीन पर केवल नाममात्र की एक तालाबनुमा आकृति देख सकते हैं।
⚖️ पलेरा जनपद सीईओ ने दिए निष्पक्ष जाँच के आदेश
इस पूरे सनसनीखेज मामले को लेकर जब पलेरा जनपद पंचायत के सीईओ अरविंद सिंह वोरकर से बात की गई, तो उनका कहना था, "यह पूरा मामला हमारे संज्ञान में आ चुका है, और हम इसकी गहनता से उच्चस्तरीय जाँच करा रहे हैं। बहुत जल्द सच्चाई पूरी तरह से सामने आ जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।"
इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले विकास कार्यों की जमीनी निगरानी और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर कई गंभीर और बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वाकई कागजों में ही फर्जी तालाब बनाकर सरकारी राशि का पूरा आहरण कर लिया गया? अगर जमीन पर हकीकत में तालाब बना ही नहीं था, तो फिर मस्टर रोल कैसे तैयार हुआ और इसका भुगतान किसके खातों में गया? इस पूरे भ्रष्टाचार के लिए आखिर असली जिम्मेदार कौन है, यह जाँच के बाद ही साफ हो सकेगा।
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