भोपाल मास्टर प्लान लागू करने की मांग तेज, 5 लाख लोगों के रोजगार और विस्थापन पर बढ़ी चिंता

भोपाल में लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान को लागू करने की सुगबुगाहट के बीच विस्थापन और रोजगार की चिंताएँ बढ़ गई हैं। साथ ही पुराने शहर में बैरिकेडिंग को लेकर व्यापारियों का विरोध जारी है।

Aug 09, 2026 - 16:27
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भोपाल मास्टर प्लान लागू करने की मांग तेज, 5 लाख लोगों के रोजगार और विस्थापन पर बढ़ी चिंता

भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में लंबे समय से लंबित पड़े मास्टर प्लान को आखिरकार लागू करने की माँग अब काफी तेजी से जोर पकड़ने लगी है। इस महत्वपूर्ण मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) भी पहले ही राज्य सरकार से अपना जवाब तलब कर चुका है। वहीं, प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय यह स्पष्ट कर चुके हैं कि मास्टर प्लान का ड्राफ्ट पूरी तरह से तैयार है और अब इसे लागू करने का अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री को लेना है।

जैसे-जैसे मास्टर प्लान के जल्द लागू होने की उम्मीदें बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे शहर में विकास कार्यों और संभावित विस्थापन को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े होने लगे हैं। इस मास्टर प्लान के लागू होने की आहट से उन हजारों परिवारों और लोगों की नींद उड़ गई है, जिनके मकान और दुकानें इस योजना की जद में आ सकते हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 5 लाख लोग प्रभावित हो सकते हैं और उनके सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

🏠 मास्टर प्लान की जद में आ सकते हैं कई मकान और व्यापारिक प्रतिष्ठान

प्रस्तावित नई विकास परियोजनाओं और योजनाओं के दायरे में आने वाले कई रिहायशी मकानों और व्यावसायिक दुकानों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। विशेष तौर पर, शहर में चल रही मेट्रो परियोजना के कारण पहले ही कई इलाकों में लोगों के मकानों और दुकानों पर प्रशासनिक कार्रवाई हो चुकी है, जिसके चलते प्रभावित परिवारों के मन में अपने आशियाने और जीविका को लेकर डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

ऐसी स्थिति में भोपाल के आम नागरिक और व्यापारी चाहते हैं कि सरकार जब भी मास्टर प्लान को लागू करे, तो वह विकास कार्यों और आम जनता के हितों के बीच एक बेहतर संतुलन बनाए। लोगों की माँग है कि जिनके घर या दुकानें उजड़ रही हैं, उन्हें उजाड़ने से पहले विधिवत विस्थापित किया जाए, ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण सुरक्षित रूप से कर सकें।

भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव अजय देवनानी ने इस संबंध में अपनी चिंता जताते हुए बताया कि, ''यदि सर्वे के दौरान लगभग 1 लाख प्रॉपर्टी इसकी जद में आती हैं, तो इससे सीधे तौर पर 5 से 6 लाख लोगों का रोजगार प्रभावित होगा। क्योंकि एक दुकान के बंद होने से केवल दुकान का मालिक ही नहीं, बल्कि वहाँ काम करने वाले कर्मचारी और अन्य लोग भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं।''

🚧 पुराने शहर में ट्रैफिक बैरिकेडिंग को लेकर व्यापारियों का उग्र विरोध

दूसरी तरफ, राजधानी भोपाल के पुराने शहर में मोती मस्जिद के पास मुख्य मार्ग पर लगाई गई ट्रैफिक पुलिस की बैरिकेडिंग को लेकर स्थानीय व्यापारियों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। व्यापारियों का साफ कहना है कि इन बैरिकेड्स के कारण रास्ते पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा और नकारात्मक असर उनके दैनिक कारोबार पर पड़ रहा है।

इस मुद्दे को लेकर व्यापारियों ने पहले जोरदार प्रदर्शन किया था और अपनी नाराजगी जताते हुए तीन दिन तक बाजार बंद रखने की चेतावनी दी थी। इसी गंभीर समस्या का हल निकालने के लिए शनिवार को भोपाल के सांसद आलोक शर्मा पीड़ित व्यापारियों के साथ सीधे पुलिस कमिश्नर संजय सिंह से मिलने पहुँचे।

🤝 पुलिस कमिश्नर और सांसद आलोक शर्मा के बीच हुई अहम बैठक

पुराने शहर के मोती मस्जिद चौराहे पर लगाए गए बैरिकेड्स के विरोध में अब शहर के तमाम व्यापारी संगठन पूरी तरह से एकजुट हो गए हैं। व्यापारियों की इन माँगों और रोष में सुर मिलाते हुए भोपाल सांसद आलोक शर्मा भी अब खुलकर मैदान में उतर आए हैं। सांसद ने व्यापारी प्रतिनिधियों के साथ पुलिस कमिश्नर संजय कुमार से मुलाकात की और इस समस्या का जल्द से जल्द कोई स्थायी समाधान निकालने की जोर-दोर से माँग की।

व्यापारियों की शिकायत और समस्या सुनने के बाद पुलिस कमिश्नर संजय सिंह ने भरोसा दिलाया कि ट्रैफिक पुलिस और एमएएनआईटी (MANIT) के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस मामले की समीक्षा की जाएगी और जल्द ही इसका व्यावहारिक समाधान निकाला जाएगा।

इस बैठक के बाद एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान ने जानकारी दी कि, ''बैरिकेडिंग की इस समस्या को लेकर भोपाल सांसद आलोक शर्मा और स्थानीय व्यापारियों के साथ एक बेहद सकारात्मक बैठक संपन्न हुई है। एक्सपर्ट्स की टीम जल्द ही मौके का मुआयना करेगी और जो भी उचित समाधान होगा, उसे लागू किया जाएगा।''

वहीं, सांसद आलोक शर्मा ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि, ''पुराने शहर की यातायात व्यवस्था सहित शहर की अन्य तमाम समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए भोपाल के मास्टर प्लान का जल्द से जल्द लागू होना बेहद आवश्यक है।'' उन्होंने यह भी बताया कि मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने की माँग को लेकर वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। सांसद ने यह भी जोड़ा कि मास्टर प्लान आने से शहर में ट्रैफिक, पार्किंग, अतिक्रमण और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याओं का एकमुश्त और बेहतर समाधान निकल सकेगा, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी माना कि इस प्रक्रिया से जुड़े लाखों लोगों के रोजगार और उनकी चिंताओं पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा।

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