वकीलों और जजों का तनाव होगा कम, अब एमपी के सभी जिला न्यायालयों में लागू होगा 'उल्लास' मॉडल
ग्वालियर से शुरू हुई 'उल्लास' पहल को अब मध्य प्रदेश के सभी जिला न्यायालयों में लागू किया जाएगा। इससे जज, वकील और कोर्ट कर्मचारी तनावमुक्त रह सकेंगे।
ग्वालियर से शुरू हुई एक सकारात्मक पहल अब पूरे मध्य प्रदेश में वकीलों और जजों के कार्यस्थल के तनाव को कम करने में मदद करेगी। प्रदेश की अदालतों में नियमित केसों की सुनवाइयों के साथ-साथ अब समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, योग शिविर और मिनी मैराथन जैसे आकर्षक आयोजन भी किए जाएंगे। इन आयोजनों में जज, वकील, कोर्ट के कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य एक साथ मिलकर उत्साह के साथ हिस्सा लेंगे।
🏛️ ग्वालियर हाईकोर्ट से हुई थी 'उल्लास' की शुरुआत
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में साल 2024 में एक विशेष आयोजन किया गया था, जिसे नाम दिया गया था— 'उल्लास, एक अभिनव प्रयोग'। इस अनूठी पहल की शुरुआत एक प्रयोग के रूप में तत्कालीन प्रशासनिक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आनंद पाठक के मार्गदर्शन में कराई गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य अदालती कामकाज की भागदौड़ और तनाव से राहत पाना तथा आपसी सामंजस्य का एक बेहतरीन और सौहार्दपूर्ण वातावरण तैयार करना था, जिसमें वकीलों और जजों के साथ-साथ उनके छोटे बच्चों व परिवारजनों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ क्विज जैसी कई रोचक गतिविधियां भी आयोजित की गईं थीं।
📍 ग्वालियर के बाद जबलपुर मुख्य पीठ तक पहुँचा सफर
ग्वालियर में इस मॉडल को मिली अपार सफलता और इसके बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद, मई 2026 में जबलपुर स्थित हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में भी इसका भव्य आयोजन कराया गया। इस कार्यक्रम की जबरदस्त सफलता और लोकप्रियता को देखते हुए अब हाईकोर्ट की मुख्य पीठ ने इसे मध्य प्रदेश के सभी जिला न्यायालयों और अधीनस्थ अदालतों में भी अनिवार्य रूप से लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
📑 AFPEW का फ्रेमवर्क तैयार, जल्द लागू होगी नई व्यवस्था
'उल्लास: एक अभिनव पहल' के सुचारू क्रियान्वयन के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया ने इसके दिशा-निर्देश आधिकारिक तौर पर जारी कर दिए हैं। इसके लिए विशेष रूप से एडवाइजरी फ्रेमवर्क फॉर प्रमोटिंग एम्प्लोयी वेलबीइंग (AFPEW) तैयार किया गया है, जो ग्वालियर खंडपीठ के सफल कार्यक्रम से प्रेरित होकर बनाया गया है। अब इसी फ्रेमवर्क के आधार पर प्रदेश की सभी निचली और ऊपरी अदालतें इन गतिविधियों का संचालन करेंगी।
🎨 थीम बेस्ड होंगे विशेष आयोजन, सालभर चलेंगी गतिविधियाँ
'उल्लास' कार्यक्रम के अंतर्गत न्याय परिसरों में वर्ष के दौरान तीन प्रमुख विशेष अवसरों पर थीम आधारित (Theme-Based) आयोजन किए जाएंगे:
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26 जनवरी (गणतंत्र दिवस): इस दिन 'फिटनेस और जागरूकता' थीम रखी जाएगी, जिसके तहत मिनी मैराथन, संविधान क्विज, हेल्थ कैंप और पुलिस या बीएसएफ बैंड की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र होंगी।
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15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस): यह दिन 'सेहत एवं हुनर' थीम को समर्पित होगा, जिसमें योग व ध्यान शिविर लगाए जाएंगे। इसके अलावा इंदौर में स्पोर्ट्स प्रतियोगिताएं, पेंटिंग एंड हैंडीक्राफ्ट्स और अन्य रचनात्मक गतिविधियां आयोजित होंगी।
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2 अक्टूबर (गांधी जयंती): यह अवसर 'संस्कृति एवं स्वच्छता' थीम के तहत मनाया जाएगा, जिसमें भव्य सांस्कृतिक संध्या, रंगोली प्रतियोगिता, लोक नृत्य (Folk Dance), नाटक और 'फूड विथआउट फायर' जैसे दिलचस्प मुकाबले होंगे।
इसके अलावा सालभर अन्य गतिविधियां जैसे स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, माइंडफुलनेस सेशन, पर्सनालिटी डेवलपमेंट व इंस्पिरेशनल सेशन, वित्तीय साक्षरता और सुरक्षित निवेश पर कार्यशालाएं, साइबर फ्रॉड से बचाव की ट्रेनिंग और बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी समय-समय पर आयोजित की जाएंगी।
💡 न्यायिक परिवार को मिलेगा सीधा लाभ, बढ़ेगी कार्यकुशलता
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के एडिशनल एडवोकेट जनरल राजेश शुक्ला के अनुसार, "यह कार्यक्रम 'उल्लास: एक अभिनव पहल' पूरे कोर्ट परिवार के कल्याण के लिए आयोजित किया जा रहा है। इससे पूरा न्यायिक परिवार अपने रोजमर्रा के मानसिक व शारीरिक तनाव को दूर कर सकेगा। जब जज, वकील और कर्मचारी शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस करेंगे, तो वे अधिक संवेदनशीलता और बेहतर संवाद के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे, जिसका सीधा लाभ कोर्ट में न्याय की आस में आने वाले आम पक्षकारों के साथ-साथ पूरे समाज को मिलेगा।"
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