Badwani जल संकट से जंगल बेहाल, गांवों की ओर बढ़ रहे वन्य जीव
बड़वानी-भीषण गर्मी का असर अब सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं जंगलों में पानी के स्रोत सूखने से वन्यजीव भी प्यास बुझाने के लिए रिहायशी इलाकों का कर रहे है रूख बड़वानी के प्रसिद्ध 52 गजा सिद्ध क्षेत्र के आसपास इन दिनों तेंदुए समेत कई जंगली जानवरों की आवाजाही बड़ी
बड़वानी शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित 52 गजा सिद्ध क्षेत्र के घने जंगल इस समय जल संकट की मार झेल रहे हैं गर्मी बढ़ने के साथ जंगलों के अधिकांश नाले, झिरियां और प्राकृतिक जल स्रोत लगभग सूख चुके हैं ऐसे में जंगली जानवर पानी की तलाश में पहाड़ियों से नीचे उतरकर आबादी वाले क्षेत्रों का रुख कर रहे हैं ग्रामीणों का कहना है कि हर साल गर्मी के मौसम में ऐसी स्थिति बनती है,लेकिन इस बार हालात ज्यादा गंभीर नजर आ रहे हैं
ग्रामीणों के अनुसार जंगल से निकलकर तेंदुए अक्सर गांवों के आसपास दिखाई दे रहे हैं कई बार वे घरों के पास बंधे मवेशियों और पालतू जानवरों को भी अपना शिकार बना चुके हैं स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही तेंदुओं की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जिससे खेतों और सड़कों पर आने-जाने वाले लोगों में भय बना रहता है
52 गजा क्षेत्र के एक सफाईकर्मी ने बताया कि कुछ समय पहले तेंदुआ उसके घर के पास से पालतू कुत्ते को उठा ले गया था वहीं एक किसान के घर से गाय के बछड़े के शिकार की घटना भी सामने आई ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल में वन्यजीवों के लिए पर्याप्त जल व्यवस्था नहीं होने के कारण जानवर गांवों की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है हालांकि अब तक किसी व्यक्ति पर हमले की घटना सामने नहीं आई है, लेकिन पालतू पशुओं के शिकार की घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है वंही जवाबदार कहते है जंगलों में पानी के स्त्रोत तैयार किये जाते है तालाब भी बनाए जाते है लेकिन समय के साथ वो भी सुख जाते है जो प्राकृतिक है उन्ही में थोड़ा बहोत पानी रह जाता है ऐसे में वन्य प्राणी रहवासी इलाकों का रुख करते है
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