बीजेपी विधायक भूपेन्द्र सिंह मानहानि मामले में दिल्ली HC सख्त, आपत्तिजनक पोस्ट हटाने के निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने बीजेपी विधायक भूपेन्द्र सिंह से जुड़े मानहानिकारक सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता।

Aug 13, 2026 - 12:42
0
बीजेपी विधायक भूपेन्द्र सिंह मानहानि मामले में दिल्ली HC सख्त, आपत्तिजनक पोस्ट हटाने के निर्देश

मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और वर्तमान बीजेपी विधायक भूपेन्द्र सिंह से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक कड़ा और महत्वपूर्ण रुख अपनाया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि "इन सामग्री में कई पोस्ट और वीडियो वादी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और मामले को सनसनीखेज बनाने का प्रयास करते दिखाई देते हैं। यह सामग्री निष्पक्ष रिपोर्टिंग अथवा तथ्यात्मक आलोचना के बजाय समय से पहले निष्कर्ष निकालती प्रतीत होती है।" हाईकोर्ट ने इस तरह के मानहानिकारक आरोप वाली पोस्ट प्रकाशित करने पर रोक लगाते हुए इन्हें तत्काल हटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही, ऐसी सामग्री प्रसारित करने वाले 5 लोगों को दो हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है, और इस मामले की अगली सुनवाई अब 5 नवंबर 2026 को तय की गई है।

🚫 प्रेस की स्वतंत्रता निरंकुश नहीं, मीडिया को चरित्रहत्या से बचना चाहिए

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इस बात पर विशेष जोर दिया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की आड़ में किसी भी व्यक्ति की गरिमा, मान-सम्मान और प्रतिष्ठा को बदनाम या अपमानित करने की खुली छूट नहीं दी जा सकती। प्रेस और मीडिया को भले ही जनहित से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग करने की पूरी स्वतंत्रता प्राप्त है, लेकिन यह आजादी निरंकुश नहीं हो सकती। अदालत ने दो टूक कहा कि मीडिया को किसी भी व्यक्ति की चरित्रहत्या (Character Assassination) से पूरी तरह बचना चाहिए। इस आदेश के दायरे में फेसबुक यूजर, एक यूट्यूब चैनल, एक दैनिक समाचार पत्र के डिजिटल विंग से जुड़े पत्रकार, एक कांग्रेस कार्यकर्ता और न्यूज चैनल के संचालक व एंकर समेत विभिन्न सोशल मीडिया मंचों से जुड़े प्रतिवादी शामिल हैं।

📰 मीडिया ट्रायल और सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

भूपेन्द्र सिंह की ओर से यह दलील दी गई थी कि इन माध्यमों से उनके खिलाफ लगातार भ्रामक और मानहानिकारक सामग्री फैलाई जा रही है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि कई पोस्ट जानबूझकर छवि धूमिल करने के लिए रची गईं। कोर्ट ने 'लक्ष्मी मुर्देश्वर पुरी बनाम साकेत गोखले' मामले का हवाला देते हुए कहा कि सोशल मीडिया के इस दौर में किसी व्यक्ति की वर्षों की मेहनत से अर्जित प्रतिष्ठा को एक विचारहीन टिप्पणी भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। इसके साथ ही, जब समाचार और रिपोर्ट्स समय से पहले ही किसी निष्कर्ष पर पहुँचकर अदालत की न्यायिक प्रक्रिया का स्थान लेने लगें, तो वह 'मीडिया ट्रायल' का रूप ले लेती है, जो न्याय के मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User