President Droupadi Murmu in MP: सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन में एमपी बना मॉडल, राष्ट्रपति मुर्मु ने की प्रयासों की सराहना

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ओंकारेश्वर में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन कार्यक्रम में भाग लिया। अब तक 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग पूरी। जानें क्या है सिकल सेल मिशन।

Jun 20, 2026 - 14:10
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President Droupadi Murmu in MP: सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन में एमपी बना मॉडल, राष्ट्रपति मुर्मु ने की प्रयासों की सराहना

खंडवा। ओंकारेश्वर के निकट थापना में आयोजित 'विश्व सिकल सेल दिवस' के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन में मध्य प्रदेश द्वारा किए गए कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। राष्ट्रपति ने कहा कि मध्य प्रदेश इस अभियान में देश के लिए एक 'मॉडल' बनकर उभरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिकल सेल के खिलाफ यह लड़ाई केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय समाज और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए लिया गया एक राष्ट्रीय संकल्प है।

📊 सात करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग: दुनिया की सबसे बड़ी जांच पहल

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि राष्ट्रीय सिकल सेल मिशन के तहत अब तक नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष की आयु तक के सात करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग पूरी हो चुकी है, जो दुनिया की सबसे बड़ी आनुवांशिक जांच पहलों में से एक है। देश में लगभग दो से ढाई करोड़ लोग सिकल सेल जीन के वाहक हो सकते हैं, जिनका सबसे अधिक प्रभाव मध्य भारत के जनजातीय क्षेत्रों में देखा गया है। राष्ट्रपति ने जोर दिया कि यह समस्या केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं, बल्कि यह आनुवांशिक जागरूकता और सामाजिक व्यवहार परिवर्तन का विषय है।

🎯 2047 से पहले सिकल सेल मुक्त भारत का लक्ष्य

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्यों की सक्रिय भागीदारी और जनसहयोग के माध्यम से भारत 2047 से पहले 'सिकल सेल मुक्त' होने का लक्ष्य हासिल कर सकता है। इस कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों, सरपंचों और स्वास्थ्य कर्मियों को सम्मानित भी किया गया। मौके पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित राज्य सरकार के अनेक मंत्री और अधिकारी उपस्थित थे।

🩸 क्या है सिकल सेल एनीमिया?

सिकल सेल एक गंभीर आनुवांशिक रक्त विकार (Genetic Blood Disorder) है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं हँसिए (Sickle) के आकार की हो जाती हैं। इसके कारण शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित होता है, जिससे एनीमिया, शरीर में तीव्र दर्द और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। समय रहते स्क्रीनिंग और उचित उपचार ही इससे बचाव का एकमात्र प्रभावी रास्ता है।

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