Humanity in Indian Railways: प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी गर्भवती महिला, बीना स्टेशन पर रेलवे डॉक्टर और आरपीएफ ने बचाई जान
बीना रेलवे स्टेशन पर मानवीय संवेदना की मिसाल। दादर-गोरखपुर एक्सप्रेस में महिला को हुआ लेबर पेन, डॉक्टरों और आरपीएफ ने प्लेटफॉर्म पर कराया सुरक्षित प्रसव।
बीना। शुक्रवार को दादर-गोरखपुर स्पेशल एक्सप्रेस (01027) में सफर कर रहे एक परिवार के लिए बीना रेलवे स्टेशन 'जीवनदाता' बनकर सामने आया। पुणे से गोरखपुर जा रही 33 वर्षीय किरण, जो गर्भावस्था के 8वें महीने में थी, को ट्रेन में अचानक असहनीय प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। पति जितेंद्र कुमार की घबराहट देख रेलवे प्रशासन ने तत्परता दिखाई और बीना स्टेशन को एक अस्थाई 'डिलीवरी रूम' में बदल दिया।
👩⚕️ अलर्ट हुआ प्रशासन, डॉक्टर और टीम पहुंची कोच के पास
जैसे ही बीना कंट्रोल रूम को सूचना मिली, आरपीएफ और मेडिकल टीम सतर्क हो गई। ट्रेन के प्लेटफॉर्म नंबर-5 पर रुकते ही सहायक उप निरीक्षक हसन खान, महिला आरक्षक जय श्री ठाकुर और रेलवे चिकित्सक डॉ. राधिका अपनी मेडिकल टीम के साथ मौके पर पहुँच गईं। स्थिति इतनी नाजुक थी कि महिला को अस्पताल ले जाने का समय नहीं बचा था, इसलिए निर्णय लिया गया कि प्रसव प्लेटफॉर्म पर ही कराया जाएगा।
🛡️ चादरों के घेरे में गूंजी किलकारी
प्लेटफॉर्म पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों और सहयात्रियों ने तुरंत चादरों और साड़ियों का एक घेरा (पर्दा) बनाकर प्रसव के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया। पूरी प्रक्रिया के दौरान यात्रियों की सांसें अटकी रहीं, लेकिन जैसे ही नवजात की किलकारी गूंजी, पूरा स्टेशन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। जच्चा-बच्चा के सुरक्षित प्रसव ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।
🏥 मां और बेटा स्वस्थ, अस्पताल में भर्ती
प्रसव के तुरंत बाद रेलवे प्रशासन ने एम्बुलेंस बुलाकर जच्चा-बच्चा को सिविल अस्पताल बीना के 'वात्सल्य शिशु गृह' में शिफ्ट किया। डॉक्टरों के अनुसार, मां किरण और उनका नवजात बेटा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। भारतीय रेलवे के सुरक्षा तंत्र ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आपात स्थिति में संवेदनशीलता और तत्परता से किसी की जान बचाई जा सकती है।
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