नरसिंहपुर में बिजली पेंशनरों का जल सत्याग्रह: 26 वर्षों से लंबित मांगों के लिए नर्मदा नदी में उतरे बुजुर्ग

नरसिंहपुर में बिजली विभाग के पेंशनरों ने अपनी मांगों को लेकर नर्मदा नदी में किया जल सत्याग्रह। महंगाई भत्ते और एरियर्स के भुगतान की सरकार से की मांग।

Jun 14, 2026 - 17:46
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नरसिंहपुर में बिजली पेंशनरों का जल सत्याग्रह: 26 वर्षों से लंबित मांगों के लिए नर्मदा नदी में उतरे बुजुर्ग

नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार की उदासीनता से नाराज बिजली विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अपनी 26 वर्षों से लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। 'मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कर्मचारी जनता यूनियन' (नरसिंहपुर) के बैनर तले शनिवार, 14 जून को विद्युत पेंशनरों ने बरमान स्थित पवित्र नर्मदा तट पर जल सत्याग्रह कर सरकार के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। महासचिव विजय चौकसे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में बुजुर्ग पेंशनर पानी में खड़े हुए और अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी।

📝 प्रमुख मांगें: एरियर्स का भुगतान और पेंशन सुरक्षा

जल सत्याग्रह के दौरान पेंशनरों ने सरकार से मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखीं:

  • धारा 49 को तत्काल प्रभाव से समाप्त करना।

  • पृथक पेंशन फंड (Separate Pension Fund) का गठन करना।

  • पेंशन का भुगतान सीधे कोषालय (Treasury) के माध्यम से सुनिश्चित करना।

  • पेंशन की कानूनी गारंटी प्रदान करना।

  • लंबित महंगाई भत्ते के एरियर्स का तत्काल भुगतान करना।

⚖️ वरिष्ठ नागरिकों के साथ पक्षपात का आरोप

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए महासचिव विजय चौकसे ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि भीषण महंगाई के दौर में वरिष्ठ पेंशनरों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा महंगाई भत्ते की घोषणा के बाद भी मध्य प्रदेश सरकार इसे समय पर लागू नहीं करती, जिससे पेंशनरों का भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने मांग की कि घोषणा तिथि से ही एरियर्स का भुगतान कर बुजुर्गों को आर्थिक राहत प्रदान की जाए।

✊ हक और सम्मान की लड़ाई जारी रहेगी

यूनियन के प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष ओपी सोनी ने जल सत्याग्रह में शामिल हुए सभी जागरूक वरिष्ठ कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह हक और सम्मान की लड़ाई है और कर्मचारी तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। उन्होंने आशा जताई कि पेंशनरों की यह गूंज अब दोनों सरकारों के कानों तक पहुँचेगी और वर्षों से लंबित इन मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

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