जबलपुर हाईकोर्ट का अहम फैसला: हिरण शिकार मामले में आरोपी को मिली जमानत, FSL रिपोर्ट रही आधार
हिरण के मांस के कथित शिकार मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आरोपी को दी जमानत। FSL रिपोर्ट में मांस की पहचान न हो पाने के कारण कोर्ट ने लिया फैसला।
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्रीष्म अवकाशकालीन एकलपीठ ने हिरण के शिकार और मांस पकाने के एक मामले में आरोपी को जमानत का लाभ दिया है। जस्टिस आरके वाणी की पीठ ने गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। मामले का आधार एफएसएल (FSL) रिपोर्ट की अनिर्णायक स्थिति बनी।
FSL रिपोर्ट बनी राहत का कारण
कटनी जिले के विजय राघवगढ़ वन परिक्षेत्र में 'वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972' के तहत यह प्रकरण दर्ज किया गया था। आरोपी प्रीतम की ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वन विभाग द्वारा जब्त किए गए पके हुए मांस की जांच एफएसएल (FSL) से कराई गई, लेकिन रिपोर्ट यह बताने में पूरी तरह असमर्थ रही कि वह मांस किस जानवर का था। याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया कि घटना का कोई भी प्रत्यक्षदर्शी गवाह मौजूद नहीं है और न ही आरोपी के खिलाफ अपराध सिद्ध करने के ठोस साक्ष्य मिले हैं।
चालान पेश, निरंतर जेल में रखने का औचित्य नहीं
आरोपी के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि प्रीतम 1 मार्च 2026 से न्यायिक अभिरक्षा में है और पुलिस द्वारा मामले में चालान भी न्यायालय के समक्ष पेश किया जा चुका है। राज्य शासन ने जमानत का विरोध किया, लेकिन एकलपीठ ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद यह माना कि जब साक्ष्य स्पष्ट नहीं हैं, तो आरोपी को निरंतर कारावास में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
आरोपी को मिली सशर्त जमानत
हाईकोर्ट ने आरोपी प्रीतम को सशर्त जमानत पर रिहा करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि राज्य में पहले भी अशोकनगर और सागर जैसे जिलों में हिरण का मांस पकाने के आरोप में गिरफ्तारियां हुई हैं, लेकिन जबलपुर हाईकोर्ट के इस फैसले ने साक्ष्य की स्पष्टता (Evidence Clarity) पर बड़ा कानूनी संदेश दिया है।
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