जबलपुर आरपीएफ का बड़ा एक्शन: आईसीजेएस (ICJS) तकनीक से दबोचे जा रहे सालों से फरार अपराधी

जबलपुर आरपीएफ अब आईसीजेएस (ICJS) तकनीक से अपराधियों का पता लगा रही है। 15 साल से फरार वारंटियों की खुली पोल, डिजिटल डेटाबेस से मिली बड़ी सफलता।

Jun 12, 2026 - 15:48
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जबलपुर आरपीएफ का बड़ा एक्शन: आईसीजेएस (ICJS) तकनीक से दबोचे जा रहे सालों से फरार अपराधी

जबलपुर। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने अब फरार अपराधियों और वारंटियों की धरपकड़ के लिए आधुनिक तकनीक 'आईसीजेएस' (Inter-Operable Criminal Justice System) का सहारा लेना शुरू कर दिया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से आरपीएफ उन आरोपियों तक भी पहुँच रही है, जिन्होंने वर्षों से अपना ठिकाना बदलकर कानून को चकमा दे रखा था।

 चार माह में 11 वारंटियों की गिरफ्तारी

डिजिटल तकनीक के उपयोग से आरपीएफ को पुराने लंबित मामलों में बड़ी सफलता मिली है। पिछले चार महीनों में आईसीजेएस सिस्टम की सहायता से जबलपुर पोस्ट ने 11 वारंटियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से कई ऐसे थे जो 10 से 15 वर्षों से फरार चल रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, जबलपुर आरपीएफ पोस्ट में 83 लंबित वारंट दर्ज थे, जिनमें से अब तक 24 वारंट तामिल किए जा चुके हैं।

 कैसे काम करता है नया डिजिटल सिस्टम?

आईसीजेएस एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिससे देश के पुलिस थाने, जेल और अन्य सुरक्षा एजेंसियां आपस में जुड़ी हुई हैं। इसमें किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी, जेल जाने की जानकारी और उसके खिलाफ दर्ज अपराध का विवरण ऑनलाइन अपडेट रहता है।

  • डिजिटल कुंडली: किसी भी अपराधी का नाम सर्च करते ही उसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड और संबंधित जानकारियां सामने आ जाती हैं।

  • सत्यता की पहचान: पहले आरोपी पूछताछ के दौरान पुलिस को गुमराह कर देते थे, लेकिन अब डिजिटल रिकॉर्ड के कारण उनकी असलियत तुरंत सामने आ जाती है।

 सफलता की कहानियाँ: तकनीक ने खोली अपराधियों की पोल
  • अंतरराज्यीय चोर का खुलासा: हाल ही में पकड़े गए बिजनौर निवासी हरविंदर सिंह उर्फ सन्नी के मामले में, उसने पूछताछ के दौरान पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। हालांकि, डिजिटल रिकॉर्ड चेक करने पर पता चला कि वह देश भर में 400 से अधिक चोरियों को अंजाम देने वाला शातिर अपराधी है।

  • 12 साल बाद गिरफ्तारी: महाराष्ट्र के जलगांव निवासी आरोपी जगत को आरपीएफ ने गिरफ्तार किया, जो पिछले 12 वर्षों से ठिकाना बदलकर छिप रहा था। डिजिटल सिस्टम की मदद से आरपीएफ उसके महाराष्ट्र के जंगलों में बने नए ठिकाने तक पहुँचने में सफल रही।

 अपराधियों पर नकेल

जबलपुर आरपीएफ पोस्ट में जनवरी के अंत से शुरू हुए इस सिस्टम ने लंबित मामलों के निराकरण में नई गति ला दी है। अब अपराधियों के लिए अपने पुराने रिकॉर्ड छिपाना असंभव हो गया है। आरपीएफ का कहना है कि तकनीक आधारित इस पहल से रेलवे परिसर को और अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिल रही है और अन्य फरार वारंटियों की तलाश जारी है।

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