उज्जैन से 15 युवाओं की 750 किमी 'पैदल न्याय यात्रा' शुरू, आरक्षण और यूजीसी सुधार जैसी मांगों को लेकर दिल्ली कूच

उज्जैन से 15 युवाओं की टोली आर्थिक आधार पर आरक्षण, यूजीसी सुधार और गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को लेकर 750 किलोमीटर की पैदल न्याय यात्रा पर दिल्ली के लिए रवाना हुई है।

Aug 18, 2026 - 18:17
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उज्जैन से 15 युवाओं की 750 किमी 'पैदल न्याय यात्रा' शुरू, आरक्षण और यूजीसी सुधार जैसी मांगों को लेकर दिल्ली कूच

मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक अनूठी और लंबी पैदल यात्रा की शुरुआत हुई है। शहर के 15 ऊर्जावान युवाओं की टोली करीब 750 से 800 किलोमीटर की लंबी 'पैदल न्याय यात्रा' पर दिल्ली के जंतर-मंतर के लिए रवाना हो चुकी है। गत 16 अगस्त को उज्जैन से शुरू हुई यह यात्रा आगर मालवा, झालावाड़, कोटा, जयपुर और मथुरा के रास्ते होते हुए दिल्ली पहुँचेगी। इन युवाओं का मुख्य लक्ष्य 21 अगस्त 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होकर लोकतांत्रिक तरीके से देशहित और समाजहित से जुड़े अपने विचार व माँगें सामने रखना है।

🎯 तीन प्रमुख माँगों के साथ युवाओं का दिल्ली कूच, आर्थिक आधार पर आरक्षण की पुरजोर वकालत

इस यात्रा के आधिकारिक पोस्टर में युवाओं की तीन मुख्य माँगें प्रमुखता से रखी गई हैं। पहली मांग है कि देश में आरक्षण का आधार पूरी तरह आर्थिक होना चाहिए, क्योंकि गरीबी किसी एक जाति की समस्या नहीं है और आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति हर वर्ग में मौजूद है। दूसरी मांग यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) में सुधार करने को लेकर है, और तीसरी मांग देश में गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिए जाने से जुड़ी है। इन युवाओं का मानना है कि शिक्षा और रोजगार के अवसर हर युवा का समान अधिकार होना चाहिए।

🎒 कड़े संघर्ष और पूरी तैयारी के साथ बढ़ रहा युवाओं का कारवां, हर 25 किलोमीटर पर तय है विश्राम

यात्रा में शामिल 15 सदस्यों की उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच है, जिसमें दीपराज सिंह पंवार, जीतू ठाकुर, ओगी ठाकुर, अनिकेत परिहार और कार्तिक सेन समेत कई अन्य युवा शामिल हैं। रास्ते में 42 वर्षीय जगदीश माहेश्वरी भी इस मुहिम से जुड़ गए हैं। यात्रा का नेतृत्व कर रहे 25 वर्षीय दीपराज सिंह पंवार का कहना है कि यदि बदलाव लाना है तो घर से बाहर निकलकर आवाज उठानी ही होगी। इस लंबी पदयात्रा के दौरान किसी भी कठिनाई से निपटने के लिए युवाओं ने हर 25 किलोमीटर पर विश्राम का स्थान तय किया है, साथ ही भोजन, पानी, दवाइयां और प्राथमिक उपचार का पूरा सामान अपने साथ रखा है।

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