हरदा में डीजल का भारी संकट: खेत में खड़े हार्वेस्टर, खाद-बीज के बाद अब ईंधन के लिए किसानों का संघर्ष

हरदा में डीजल की भारी किल्लत से किसान परेशान। हार्वेस्टर और ट्रैक्टर ठप, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें। बुवाई के समय ईंधन संकट से बढ़ी किसानों की चिंता।

Jun 12, 2026 - 21:49
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हरदा में डीजल का भारी संकट: खेत में खड़े हार्वेस्टर, खाद-बीज के बाद अब ईंधन के लिए किसानों का संघर्ष

हरदा। मध्य प्रदेश के हरदा जिले में किसान इन दिनों दोहरी मार झेल रहे हैं। खाद और बीज के बाद अब डीजल की किल्लत ने किसानों की कमर तोड़ दी है। पेट्रोल पंपों पर डीजल पहुँचते ही भारी भीड़ उमड़ रही है, जहाँ अपनी बारी पाने के लिए किसानों को कड़ी मशक्कत और धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ रहा है।

 खरीफ की बुवाई और कटाई का काम ठप

वर्तमान में किसानों के लिए मूंग की कटाई और खरीफ की फसल की बुआई का समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। डीजल न मिलने के कारण ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और सिंचाई के उपकरण पूरी तरह ठप पड़े हैं। किसानों का कहना है कि यदि बारिश से पहले बुआई नहीं हुई, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। खेती का काम समय पर न हो पाने से अन्नदाता गहरे संकट में है।

 ईंधन की तलाश में भटक रहे किसान

डीजल की समस्या इतनी विकराल है कि किसान अपने क्षेत्र को छोड़कर 30 से 40 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय तक डीजल लेने पहुँच रहे हैं। टिमरनी क्षेत्र के किसान अशोक गुर्जर ने बताया कि उनके आसपास किसी भी पंप पर डीजल उपलब्ध नहीं था, जिसके चलते उन्हें हरदा आना पड़ा। स्थिति यह है कि हार्वेस्टर संचालक अपने मशीनें खेतों में खड़ी छोड़कर डीजल के लिए लाइनों में घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।

 सीमित मात्रा में डीजल, बढ़ता तनाव

पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा एक व्यक्ति को अधिकतम 50 लीटर तक ही डीजल दिया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोगों की जरूरत पूरी हो सके। पंप संचालक संजय कनेरे का कहना है कि डिपो से ही आपूर्ति बाधित है, जिसके कारण यह संकट खड़ा हुआ है। उन्होंने किसानों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन खेतों में खड़ी फसलों की चिंता के कारण पंपों पर अक्सर झगड़े और अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है।

 प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरें

किसानों का कहना है कि अगर समय रहते डीजल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो बुआई का पूरा सीजन प्रभावित हो जाएगा। हरदा के किसान अब जिला प्रशासन से उम्मीद कर रहे हैं कि वे डिपो स्तर पर हस्तक्षेप कर डीजल की निर्बाध आपूर्ति बहाल करवाएं ताकि समय पर कृषि कार्य पूरे किए जा सकें।

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