चावल पकते ही क्यों टूट जाते हैं? IIT इंदौर के शोध में सामने आई वैज्ञानिक वजह
क्या आपके चावल पकाते समय टूट या फट जाते हैं? IIT इंदौर के शोध में इसके पीछे 'चाकी ग्रेन्स' और सूक्ष्म दरारों का वैज्ञानिक कारण सामने आया है।
इंदौर। रोजमर्रा की रसोई में हम सभी चावल पकाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ चावल पकने के बाद लंबे और खिले-खिले रहते हैं, जबकि कुछ दाने टूट या मुड़ जाते हैं? अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) इंदौर के विशेषज्ञों ने इस समस्या के पीछे का वैज्ञानिक कारण खोज निकाला है। शोध के अनुसार, चावल के दानों के अंदर मौजूद सूक्ष्म दरारें ही यह तय करती हैं कि चावल पकने के बाद कैसा दिखेगा।
'चाकी ग्रेन्स' और पानी सोखने की प्रक्रिया
शोधकर्ताओं ने अपनी जांच में पाया कि कुछ चावल के दानों के अंदर छोटी दरारें और हवा की खाली जगहें (एयर पॉकेट्स) होती हैं, जिन्हें “चाकी ग्रेन्स” कहा जाता है। ये दाने सामान्य दानों की तुलना में 2.7 गुना तेजी से पानी सोखते हैं। यही कारण है कि पानी में भिगोते ही ये दाने कमजोर हो जाते हैं और पकने से पहले ही टूटने लगते हैं। यह अध्ययन 'जर्नल ऑफ फूड साइंस' में प्रकाशित हुआ है।
बासमती चावल पर प्रयोग के निष्कर्ष
टीम ने विशेष रूप से '1121 बासमती चावल' पर अध्ययन किया, जिसमें चौंकाने वाले परिणाम सामने आए:
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फटने की दर: पूरी तरह 'चाकी' दानों में से लगभग 67% दाने पकते समय फट गए।
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मजबूत दाने: उच्च गुणवत्ता वाले दानों में फटने की दर केवल 13% रही।
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टेढ़ेपन की वजह: जब चावल पानी सोखता है, तो दाने का हर हिस्सा एक समान गति से नहीं फूलता। दबाव के अंतर के कारण दाने मुड़ जाते हैं या टेढ़े हो जाते हैं।
शोध का महत्व और भविष्य की संभावनाएं
IIT इंदौर के निदेशक प्रो. सुहास एस. जोशी के अनुसार, यह शोध केवल रसोई तक सीमित नहीं है। डॉ. अंकुर मिगलानी और उनकी शोध टीम का मानना है कि यह अध्ययन चावल उद्योग के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। इससे न केवल चावल की गुणवत्ता जांचने में आसानी होगी, बल्कि भविष्य में बेहतर किस्म के बीज तैयार करने और अच्छी गुणवत्ता वाले दानों को पहचानने में भी बड़ी मदद मिलेगी।
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