मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुनकर रोहित रूसिया को किया सम्मानित, विलुप्त होती कला को दे रहे जीवन
छिंदवाड़ा के रोहित रूसिया को घिचा सिल्क पर आदिवासियों की प्राचीन गोदना कला को सहेजने के लिए राज्य स्तरीय विश्वकर्मा सम्मान से नवाजा गया है। मुख्यमंत्री ने उन्हें सम्मानित किया।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के होनहार कलाकार रोहित रूसिया को वर्ष 2022-23 के लिए प्रतिष्ठित 'राज्य स्तरीय विश्वकर्मा सम्मान' से नवाजा गया है। रोहित को यह गौरवशाली सम्मान घिचा सिल्क की साड़ियों पर आदिवासियों की पारंपरिक और विलुप्त होती 'गोदना कला' की समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने और उसे सहेजने के लिए प्रदान किया गया है। आधुनिक दौर में जहां लोग शरीर पर आधुनिक टैटू की ओर आकर्षित हो रहे हैं, वहीं रोहित अपनी कला के जरिए आदिवासी संस्कृति की इस अनूठी पहचान को कपड़ों के माध्यम से एक नया जीवन दे रहे हैं, जो सतपुड़ा अंचल और आदिवासी बहुचर्चित संस्कृतियों की सबसे बेहतरीन कलाओं में से एक है।
🧵 क्या होती है ब्लॉक प्रिंटिंग और कैसे तैयार होते हैं घिचा सिल्क के कपड़े?
रोहित रूसिया बताते हैं कि ब्लॉक प्रिंटिंग पारंपरिक रूप से छीपा समुदाय का जीविकोपार्जन का मुख्य जरिया हुआ करता था, जिसमें हाथों से सूत कातकर कपड़ा तैयार किया जाता था और लकड़ी के सांचों व प्राकृतिक रंगों से उस पर परंपरागत चित्रकारी उकेरी जाती थी। समय के साथ यह कला विलुप्त होती गई, लेकिन आज सतपुड़ा अंचल में वे और उनके गुरु इस कला को जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने बताया कि 'घिचा सिल्क' दरअसल तसर सिल्क बनाने की प्रक्रिया के दौरान बचे या टूटे हुए कोकून के धागों से तैयार किया जाने वाला एक प्राकृतिक और बेहद खूबसूरत खुरदुरा सिल्क फैब्रिक होता है, जिस पर काम करना अपने आप में एक कला है।

🖋️ क्या होती है पारंपरिक गोदना कला और इसका क्या है सांस्कृतिक महत्व?
गोदना कला के बारे में बताते हुए रोहित कहते हैं कि यह शरीर पर सुई या कांटे से सूक्ष्म छेद कर प्राकृतिक स्याही भरकर चित्र उकेरने की एक प्राचीन टैटू शैली है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार की प्रमुख जनजातियों जैसे—भारिया, बैगा, सहरिया और गोंड में गोदना को केवल शरीर की सजावट नहीं, बल्कि व्यक्ति की मूल पहचान और सांस्कृतिक धरोहर माना जाता है। जनजातीय मान्यताओं के अनुसार, गोदना मरने के बाद भी इंसान के साथ रहता है और उसे बुरी नजर या बीमारियों से बचाता है। इसकी पारंपरिक स्याही को तैयार करने के लिए काजल, काले तिल के तेल और प्राकृतिक राख का उपयोग किया जाता है।
🏆 भोपाल के मिंटो हॉल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया सम्मानित
राजधानी भोपाल के प्रतिष्ठित मिंटो हॉल में आयोजित 'कबीर बुनकर एवं विश्वकर्मा पुरस्कार समारोह' के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रोहित रूसिया को शॉल, श्रीफल और एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि भेंट कर सम्मानित किया। उनके इस उत्कृष्ट कार्य में पारंपरिक भारतीय शिल्प की सुंदरता, स्थानीय जनजातीय संस्कृति की गहरी झलक और आधुनिक फैशन की नवीनता का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने अपने इस हुनर के माध्यम से यह साबित कर दिखाया है कि कैसे पारंपरिक कलाओं को संरक्षित रखते हुए उन्हें आज के आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप विकसित किया जा सकता है। उनकी कृतियां न केवल कलात्मक रूप से बेहद आकर्षक हैं, बल्कि यह स्थानीय शिल्प परंपरा को एक वैश्विक मंच और नई पहचान भी प्रदान कर रही हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)