नागर शैली में बना भव्य मंदिर, राजस्थान के लाल पत्थरों और संग्रहालय से सजी है संत रविदास की गाथा

सागर में 101 करोड़ की लागत से संत रविदास का भव्य मंदिर बनकर तैयार है। फरवरी 2027 में इसके लोकार्पण की संभावना है, जिसे आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

Aug 27, 2026 - 13:34
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नागर शैली में बना भव्य मंदिर, राजस्थान के लाल पत्थरों और संग्रहालय से सजी है संत रविदास की गाथा

भारत की राजनीति में धर्म और जाति का समीकरण हमेशा से सत्ता की सीढ़ी चढ़ने का एक प्रभावी जरिया रहा है। मंदिर और मंडल की राजनीति के बाद देश का कोई भी राजनीतिक दल इन दोनों फैक्टर्स को नजरअंदाज नहीं कर सकता। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनावों से ठीक पहले 12 अगस्त 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सागर में संत रविदास के भव्य मंदिर और संग्रहालय की आधारशिला रखी थी, जिसके बाद इन राज्यों में बीजेपी को बड़ी सफलता मिली। अब सागर के बड़तूमा में 101 करोड़ रुपये की लागत से 11.21 हेक्टेयर क्षेत्र में संत रविदास का यह भव्य मंदिर बनकर पूरी तरह तैयार है, जिसके फरवरी 2027 में संभावित लोकार्पण को लेकर सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।

🗳️ एससी वोट बैंक और चुनावी गणित: यूपी और पंजाब के चुनावों पर रहेगा खास फोकस

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संत रविदास मंदिर के जरिए बीजेपी उस अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के वोट बैंक में पैठ बनाने में सफल रही है, जिसे पारंपरिक रूप से कांग्रेस का कोर वोटर माना जाता रहा है। फरवरी 2027 के मध्य में संभावित राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान इस मंदिर का लोकार्पण काफी रणनीतिक माना जा रहा है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश और पंजाब ऐसे राज्य हैं जहाँ रविदास संप्रदाय के अनुयायियों और अनुसूचित जाति की आबादी बहुत बड़ी संख्या में है। पंजाब में 32% और उत्तर प्रदेश में 21% एससी आबादी है, जो वहां सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभाती है। वहीं, मध्य प्रदेश की 230 सीटों में से 35 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं, जहाँ करीब 25 जिलों में एससी मतदाता असरदार स्थिति में हैं।

🚩 'समरसता कलश यात्रा' और राजनीतिक दल आमने-सामने: कांग्रेस ने बोला हमला

इस मंदिर निर्माण और आगामी राजनीतिक रणनीतियों को लेकर पक्ष और विपक्ष के अपने-अपने दावे हैं। बीजेपी ने देश भर में संत रविदास की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में 'समरसता संकल्प अभियान एवं पावन माटी कलश वितरण' का आयोजन शुरू किया है, जिसके तहत वाराणसी से चली कलश यात्रा भोपाल पहुँची। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत कई दिग्गजों ने इसमें हिस्सा लिया। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी ने कड़ा विरोध जताते हुए आरोप लगाया है कि बीजेपी का संतों और महापुरुषों से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि पार्टी केवल चुनावों को देखते हुए इनका राजनीतिकरण कर रही है।

🔴 अद्भुत वास्तुकला और सुविधाएं: राजस्थान के लाल पत्थरों से सजा है 66 फीट ऊंचा मंदिर

मकरोनिया क्षेत्र के बड़तूमा में मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा निर्मित यह मंदिर नागर शैली की तर्ज पर 5500 वर्ग फीट में फैला हुआ है। धौलपुर (राजस्थान) के प्रसिद्ध वंशीपहाड़पुर के लाल पत्थरों से बने इस 66 फीट ऊंचे मंदिर के गर्भगृह में बिना लोहे के केवल पत्थर, रेत और गिट्टी का उपयोग किया गया है। मंदिर परिसर में संत रविदास के जीवन दर्शन को दर्शाती दीवार की कलाकृतियां (म्युरल स्कल्प्चर), एक भव्य इंटरप्रिटेशन म्यूजियम (व्याख्या संग्रहालय) और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 15 एसी कमरों वाला विशाल 'भक्त निवास' भी तैयार किया गया है, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों और भक्तों को बेहतरीन सुविधाएं मिल सकें।

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