मंदसौर के मॉडल स्कूल ने दिए 12 से ज्यादा नेशनल खिलाड़ी, लेकिन ट्रेनिंग सेंटर्स की कमी बन रही बड़ी बाधा

मध्य प्रदेश के रतलाम और मंदसौर के सरकारी स्कूलों से वेटलिफ्टिंग के बेहतरीन खिलाड़ी सामने आ रहे हैं। संसाधनों की कमी के बावजूद युवा राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत रहे हैं, लेकिन ट्रेनिंग सेंटर न होने से सफर प्रभावित हो रहा है।

Aug 27, 2026 - 13:09
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मंदसौर के मॉडल स्कूल ने दिए 12 से ज्यादा नेशनल खिलाड़ी, लेकिन ट्रेनिंग सेंटर्स की कमी बन रही बड़ी बाधा

मध्य प्रदेश से अब क्रिकेट, हॉकी और निशानेबाजी के अलावा एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग जैसे खेलों में भी युवा खिलाड़ी तेजी से आगे आ रहे हैं। पश्चिमी मध्य प्रदेश के रतलाम और मंदसौर जिलों के शासकीय स्कूलों से वेटलिफ्टिंग के बेहतरीन युवा खिलाड़ी निकलकर सामने आ रहे हैं। पिछले चार-पांच सालों से मंदसौर के शासकीय मॉडल माध्यमिक विद्यालय भानपुरा से एक-दो नहीं बल्कि 12 से अधिक खिलाड़ियों ने प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपने जिले और पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। इसके साथ ही, रतलाम के सैलाना स्थित सांदीपनि विद्यालय के विद्यार्थियों का चयन भी अंडर-17 राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है, जो सरकारी स्कूलों में सीमित संसाधनों के बावजूद खिलाड़ियों के जज्बे को बयां करता है।

🏫 शासकीय मॉडल स्कूल भानपुरा बना वेटलिफ्टिंग का हब, बच्चों के साथ बेटियों ने भी मारी बाजी

मंदसौर के भानपुरा स्थित शासकीय मॉडल स्कूल में पिछले 5-6 वर्षों से वेटलिफ्टिंग के खेल की अनूठी शुरुआत की गई। यहां के खेल शिक्षक किशोर माली ने बताया कि शुरुआत में विद्यालय के खेल फंड से कुछ सामान्य सामग्री खरीदकर बच्चों को अभ्यास कराना शुरू किया गया था। धीरे-धीरे बच्चों की रुचि बढ़ी और उन्होंने पहले ही साल में शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद जनसहयोग और स्कूल के शिक्षकों की मदद से कुछ और संसाधन, वेटलिफ्टिंग रॉड और प्लेट्स जुटाई गईं। खास बात यह है कि लड़कों के साथ-साथ अब बड़ी संख्या में छात्राएं भी इस खेल में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। हाल ही में भानपुरा में आयोजित इंटर-स्कूल वेटलिफ्टिंग कॉम्पिटिशन में मन्नू पाटीदार, रानी सरदार और शाजापुर के राघव दीक्षित ने बेहतरीन प्रदर्शन कर राज्य स्तर के लिए क्वालीफाई किया है।

⚠️ प्रतिभाएं तो हैं, लेकिन डेडीकेटेड ट्रेनिंग सेंटर न होने के कारण छूट रहा खेल

सरकारी स्कूलों की इन छोटी कक्षाओं और सीमित सुविधाओं के बीच से निकलने वाले खिलाड़ियों की संख्या भले ही हर साल बढ़ रही है, लेकिन एक बड़ी विडंबना यह भी है कि पूर्व में मेडल जीत चुके कई खिलाड़ी अब मजबूरन वेटलिफ्टिंग छोड़ चुके हैं। स्कूल और कॉलेज स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने वाले सूर्य प्रताप सिंह हाड़ा ने बताया कि वे अब उज्जैन में स्पोर्ट्स एजुकेशन की पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने वेटलिफ्टिंग छोड़ दी है क्योंकि अभ्यास के लिए राज्य में कोई डेडीकेटेड सेंटर उपलब्ध नहीं है। उन्होंने इंदौर और भोपाल तक संपर्क किया था, लेकिन वहां भी इस खेल के लिए कोई विशेष ट्रेनिंग सेंटर नहीं मिला।

🌟 सही प्रोत्साहन और सुविधाएं मिलें तो देश के लिए मेडल जीत सकते हैं युवा खिलाड़ी

वेटलिफ्टिंग की नेशनल खिलाड़ी और रतलाम की पूर्व जिला खेल अधिकारी रुबिका देवन का कहना है कि मध्य प्रदेश में युवाओं का वेटलिफ्टिंग के प्रति बढ़ता रुझान बेहद सकारात्मक संकेत है, लेकिन प्रदेश स्तर पर विशेष प्रशिक्षण केंद्रों की कमी आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यदि इन कच्ची और प्रतिभाशाली युवा प्रतिभाओं को सरकार और खेल विभाग की तरफ से सही कोचिंग, आधुनिक उपकरण और पर्याप्त सुविधाएं मिल जाएं, तो ये खिलाड़ी भविष्य में देश और प्रदेश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वर्ण पदक जीत सकते हैं।

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