बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ की मिसाल बना भाई, बहन के भविष्य के लिए बचाए पैसे

बुरहानपुर में एक भाई ने ढाई साल की पॉकेट मनी बचाकर रक्षाबंधन पर अपनी बहन को 51 हजार रुपये गिफ्ट किए। इस राशि से बहन की पढ़ाई के लिए एफडी कराई जाएगी।

Aug 29, 2026 - 17:06
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बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ की मिसाल बना भाई, बहन के भविष्य के लिए बचाए पैसे

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर शहर में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर भाई-बहन के बीच पवित्र प्रेम और समर्पण की एक बेहद दिल को छू लेने वाली तस्वीर सामने आई है। शहर के एक भाई ने अपनी छोटी सी बहन के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अपनी कई महीनों की पॉकेट मनी बचाकर गुल्लक में जोड़ी थी। रक्षाबंधन के दिन जब बहन ने उसकी कलाई पर राखी बांधी, तो भाई ने वह पूरी राशि उपहार के रूप में बहन को सौंप दी। परिवार वालों की सहमति से अब इस राशि से बहन के नाम पर फिक्स डिपॉजिट (FD) कराई जाएगी, ताकि भविष्य में उसकी उच्च शिक्षा और पढ़ाई-लिखाई में यह पैसे पूरी तरह काम आ सकें।

🪙 गुल्लक में छिपाई थी बचत की बात, माता-पिता भी रह गए दंग

शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मंडी चौक निवासी उमेश जंगाले के 14 वर्षीय पुत्र भव्य जंगाले ने यह अनूठी मिसाल पेश की है। जब 3 वर्षीय छोटी बहन मानवी जंगाले ने अपने भाई भव्य की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा, तो भाई ने बिना एक पल गंवाए 51 हजार रुपये की नगद राशि अपनी बहन के हाथों में थमा दी। भव्य ने यह राशि पिछले करीब ढाई साल से अपनी पॉकेट मनी से बचाकर गुल्लक में इकट्ठा की थी। उसने अपनी इस छोटी-छोटी बचतों और इच्छाओं को सीमित रखकर कुल 55 हजार रुपये जोड़े थे, और इस बात की भनक अपने परिवार को भी नहीं लगने दी थी। अचानक सामने आए इस नजारे को देखकर माता-पिता और अन्य परिजन पूरी तरह दंग और भावुक हो गए।

📚 बहन की शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता: समाज के लिए प्रेरणा बनी भाई की सोच

जब माता-पिता ने भव्य से इतनी बड़ी राशि के बारे में पूछताछ की, तो उसने सारा वाकया प्यार से बता दिया। भव्य ने कहा कि उसने ये रुपये अपनी लाडली बहन मानवी की बेहतर पढ़ाई के लिए ही जोड़े हैं। पिता उमेश जंगाले ने बताया कि बेटा अपनी छोटी-छोटी जरूरतों का त्याग कर लगातार पैसे जोड़ता रहा और अब इस राशि से मानवी के नाम पर बैंक में एफडी कराई जाएगी। भव्य की इस सकारात्मक और दूरदर्शी सोच ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' के संदेश को धरातल पर सच साबित कर दिखाया है। परिवार का कहना है कि बेटियां दो परिवारों को रोशन करती हैं और इस तरह की घटनाएं समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं।

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