खंडवा: बिहारीपुरा खुर्द में जर्जर स्कूल भवन में पढ़ने को मजबूर मासूम, छत से गिर रहा सीमेंट; बड़ा हादसा होने का डर
खंडवा के बिहारीपुरा खुर्द में स्कूल भवन जर्जर, छत से गिर रहा सीमेंट। 40 बच्चों की जान जोखिम में। प्रशासन अब भी मौन।
खंडवा। ग्राम बिहारीपुरा खुर्द स्थित शासकीय प्राथमिक शाला का भवन इन दिनों पूरी तरह जर्जर हो चुका है। स्थिति इतनी खतरनाक है कि स्कूल की छत से लगातार सीमेंट झड़ रहा है और लोहे के सरिए बाहर दिखाई दे रहे हैं। बारिश और तेज हवाओं के दौरान कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। पालकों और ग्रामीणों की बार-बार शिकायतों के बावजूद, अब तक मरम्मत या नए भवन निर्माण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
🏫 40 बच्चों की सुरक्षा दांव पर
मोहना संकुल के अंतर्गत आने वाले इस स्कूल में कक्षा पहली से पांचवीं तक के करीब 40 बच्चे शिक्षा प्राप्त करते हैं। 15 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन स्कूल भवन की हालत ऐसी है कि वहां बच्चों को बैठाना मौत को दावत देने जैसा है। स्थानीय ग्रामीण केशव अटूडे का कहना है कि मानसून की पहली बारिश के साथ ही छत का हिस्सा कभी भी गिर सकता है, जिससे मासूम बच्चों की जान खतरे में है।
📢 प्रशासन की बेरुखी से ग्रामीणों में रोष
बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत, पुनासा बीआरसी कार्यालय और जनपद पंचायत के अधिकारियों को लिखित रूप में अवगत कराया है, लेकिन हर बार उन्हें कोरे आश्वासन ही मिले हैं। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। पालकों का कहना है कि वे बच्चों की पढ़ाई तो चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा से समझौता कर उन्हें स्कूल भेजने में वे डर रहे हैं।
📉 जिले के 383 स्कूलों को है मरम्मत की दरकार
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, खंडवा जिले में 1400 से अधिक स्कूल संचालित हैं, जिनमें से 383 स्कूलों को तत्काल मरम्मत और मेंटेनेंस की आवश्यकता है। इनमें से 208 स्कूलों की हालत तो अत्यंत गंभीर है। इन स्कूलों की मरम्मत के लिए करीब 6 करोड़ 20 लाख से 8 करोड़ रुपये तक की आवश्यकता है, लेकिन फंड के अभाव में काम अटका पड़ा है।
🗣️ जिला शिक्षा अधिकारी का बयान
इस मामले पर खंडवा के जिला शिक्षा अधिकारी पीएस सोलंकी ने कहा, "बिहारीपुरा खुर्द के प्राथमिक स्कूल भवन को लेकर मिली शिकायतों के बाद मैंने संज्ञान लिया है। स्कूल भवन का जल्द ही जायजा लिया जाएगा और मरम्मत कराई जाएगी। यदि भवन असुरक्षित पाया गया, तो बच्चों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था की जाएगी।"
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