मैहर मां शारदा मंदिर में 1 जुलाई से पॉलिथीन पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन करने पर देना होगा 500 रुपये जुर्माना

मैहर स्थित मां शारदा देवी मंदिर परिसर में 1 जुलाई 2026 से पॉलिथीन पूरी तरह बैन। नियम तोड़ने पर 500 रुपये का जुर्माना। प्रशासन ने की सहयोग की अपील।

Jun 14, 2026 - 17:59
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मैहर मां शारदा मंदिर में 1 जुलाई से पॉलिथीन पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन करने पर देना होगा 500 रुपये जुर्माना

मैहर। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी मैहर में पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता संवर्धन और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मां शारदा देवी मंदिर प्रबंधन समिति ने एक बड़ा निर्णय लिया है। मंदिर प्रशासक दिव्या पटेल द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से संपूर्ण मंदिर और मेला परिक्षेत्र को पॉलिथीन मुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया गया है।

🌿 स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल परिसर की पहल

मंदिर प्रबंधन का मानना है कि प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए मैहर पहुंचते हैं। भारी संख्या में पॉलिथीन के उपयोग से मंदिर परिसर में गंदगी फैलती है, जो न केवल स्वच्छता को प्रभावित करती है बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती है। इस समस्या को देखते हुए प्रबंधन ने पॉलिथीन के भंडारण, वितरण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का सराहनीय कदम उठाया है।

📅 1 जुलाई से प्रभावी होंगे नियम

जारी निर्देशों के तहत, 1 जुलाई 2026 से किसी भी प्रकार की पॉलिथीन थैली, प्लास्टिक कैरी बैग अथवा अन्य प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री मंदिर व मेला परिसर में पूरी तरह वर्जित रहेगी। यह नियम श्रद्धालुओं के साथ-साथ सभी दुकानदारों, व्यापारियों और वहां कार्यरत अन्य संबंधित व्यक्तियों पर समान रूप से लागू होगा।

💰 उल्लंघन करने पर अर्थदंड का प्रावधान

मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति आदेश का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करते हुए 500 रुपये का अर्थदंड (जुर्माना) लगाया जाएगा। प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं और दुकानदारों से कपड़े या कागज के बने पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाने की अपील की है।

🤝 जनसहयोग से सफल होगी मुहिम

मंदिर प्रशासक दिव्या पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से यह आदेश जारी किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि जनभागीदारी से ही 'पॉलिथीन मुक्त मैहर' का लक्ष्य सफल हो सकेगा। यह पहल न केवल मंदिर क्षेत्र की स्वच्छता बढ़ाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संदेश भी देगी।

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