नेहरू स्टेडियम में राहुल गांधी के लाइव कंसर्ट पर विवाद, नगर निगम कमिश्नर से मिला कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल
राहुल गांधी के इंदौर दौरे से पहले नेहरू स्टेडियम में होने वाले 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम की अनुमति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम हाईकोर्ट की गाइडलाइन के आधार पर विचार कर रहा है।
कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के तहत राहुल गांधी के प्रस्तावित इंदौर दौरे पर अभी से राजनीतिक खींचतान और विवाद शुरू हो गया है। दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने शहर के बीचों-बीच स्थित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आगामी 12 सितंबर को राहुल गांधी के लाइव कंसर्ट का कार्यक्रम तय किया है, लेकिन इसके लिए अब तक आधिकारिक अनुमति नहीं मिल पाई है। जंतर-मंतर पर जेन-जी के आंदोलन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की भागीदारी के बाद देश के विभिन्न राज्यों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिसके तहत मध्य प्रदेश में भी इसकी तैयारी चल रही है।
⚽ खेल गतिविधियां प्रभावित होने का हवाला और भाजपा नेताओं की आपत्तियों से फंसा मामला
जैसे ही कांग्रेस ने इस आयोजन के लिए नेहरू स्टेडियम का चयन किया, स्थानीय खेल संगठनों और भाजपा नेताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जतानी शुरू कर दी। उनका तर्क है कि नेहरू स्टेडियम में नियमित रूप से खेल गतिविधियां संचालित होती हैं, ऐसे में वहाँ किसी भी प्रकार का राजनीतिक या बड़ा आयोजन होने से खिलाड़ियों का अभ्यास प्रभावित होगा। अनुमति मिलने में हो रही देरी और असमंजस की स्थिति को देखते हुए शहर कांग्रेस कमेटी ने नगर निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर 8 से 12 सितंबर तक स्टेडियम को किराए पर लेने की औपचारिक पेशकश की है, जिस पर अब प्रशासनिक स्तर पर मंथन जारी है।
👥 कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने की निगम कमिश्नर से मुलाकात, हाईकोर्ट की गाइडलाइन के अध्ययन के बाद होगा फैसला
सोमवार को कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंहल से मुलाकात कर जल्द से जल्द अनुमति देने की मांग की। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक आयोजन नहीं है, इसलिए अनुमति न मिलने का सवाल ही नहीं उठता, हालांकि सत्ताधारी दल के दबाव के चलते यदि अनुमति नहीं मिलती है तो किसी वैकल्पिक स्थान पर विचार किया जाएगा। वहीं, निगम कमिश्नर का कहना है कि नेहरू स्टेडियम के उपयोग को लेकर पूर्व में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है, जिसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि नेहरू स्टेडियम की अनुमति नहीं मिलती है, तो कांग्रेस खालसा स्टेडियम, खंडवा रोड या सुपर कॉरिडोर के मैदानों को विकल्प के रूप में देख रही है।
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