चित्रकूट में बाढ़ के बाद की तबाही और राहत कार्य जारी, सड़कों से मलबा हटाने के लिए जुटीं नगर निगम की टीमें
चित्रकूट में भारी बारिश और बाढ़ के बाद अब जनजीवन को पटरी पर लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। जिला प्रशासन द्वारा सड़कों की सफाई और नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है।
मध्य प्रदेश के धार्मिक स्थल चित्रकूट में भारी बारिश और मूसलाधार बाढ़ से मची तबाही के निशान अभी भी पूरी तरह मिट नहीं पाए हैं। मंदाकिनी नदी के किनारे और पूरे शहर में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसके कारण घरों और सड़कों पर भारी मात्रा में कीचड़ जमा हो गया है और लोग अभी भी इस आपदा से सहमे हुए हैं। लगातार 3 से 4 दिनों तक जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त रहने के बाद अब स्थानीय लोग अपनी सामान्य दिनचर्या को पटری पर लाने की कोशिश में जुटे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने चित्रकूट की सड़कों से मलबा और कीचड़ हटाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है, हालांकि रविवार रात से जारी रिमझिम बारिश ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा रखी हैं।
🚨 जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर, बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन और पेयजल की व्यवस्था
रुक-रुककर हो रही बारिश के चलते जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर काम कर रहा है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार मंदाकिनी नदी का अधिकतम बाढ़ स्तर 139.60 मीटर है, जबकि सोमवार सुबह आरोग्य धाम के पास जलस्तर 137.05 मीटर दर्ज किया गया। बाढ़ से प्रभावित और बेघर हुए लोगों के लिए लगातार भोजन के पैकेट तैयार कर वितरित किए जा रहे हैं, साथ ही टैंकरों के जरिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। सड़कों की सफाई के लिए चित्रकूट नगर परिषद के साथ-साथ सतना नगर निगम की टीमों को भी मैदान में उतारा गया है। इसके अलावा, प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर बाढ़ पीड़ितों के नुकसान का सर्वे भी कराया जा रहा है।
🌉 दर्जनों पुल-पुलिया और रपटे टूटे, मुख्यमंत्री के दौरे के बाद चीफ इंजीनियर ने किया निरीक्षण
शनिवार को आई इस भयंकर बाढ़ ने सैकड़ों परिवारों की गृहस्थी का सामान तबाह कर दिया है। जलस्तर घटने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद पैदल चलकर बाढ़ग्रस्त इलाकों का जायजा लिया था। सोमवार को पीडब्ल्यूडी (सेतु विभाग) के चीफ इंजीनियर गोपाल सिंह ने चित्रकूट पहुंचकर क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों का बारीकी से निरीक्षण किया। बाढ़ के कारण मझगवा पिंडरा पुलिया, नयागांव पुल, रामपुर बाघेलान और सोहावल समेत एक दर्जन से अधिक पुल-पुलिया और रपटे पूरी तरह टूट चुके हैं, जिससे कई मार्गों का संपर्क कट गया है। सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने बताया कि नुकसान का आकलन कर इन सभी संरचनाओं के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जा रहा है।
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