बंदूकधारियों के निशाने के बाद शुरू होता है भुजरियों का विसर्जन, झूकरजोगी गांव की परंपरा देख रह जाएंगे हैरान

विदिशा के झूकरजोगी गांव में भुजरिया पर्व पर एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। यहाँ ऊंचे पेड़ पर बंधे नारियल पर बंदूक से सटीक निशाना लगाने के बाद ही विसर्जन होता है।

Aug 31, 2026 - 14:27
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बंदूकधारियों के निशाने के बाद शुरू होता है भुजरियों का विसर्जन, झूकरजोगी गांव की परंपरा देख रह जाएंगे हैरान

मध्य प्रदेश अपनी समृद्ध और विविध सांस्कृतिक परंपराओं के लिए पूरे देश में जाना जाता है, जहाँ हर त्योहार को मनाने के अपने अनूठे ढंग हैं जिनका पालन आज भी ग्रामीण इलाकों में पूरी शिद्दत से किया जाता है। ऐसी ही एक बेहद रोमांचक और अनोखी परंपरा विदिशा जिले के झूकरजोगी गांव में भुजरिया पर्व के अवसर पर देखने को मिलती है। इस पर्व के दौरान भुजरियों के विसर्जन से पहले एक विशेष रस्म निभाई जाती है, जिसमें लगभग 300 से 400 फीट ऊंचे पेड़ पर एक नारियल बांधा जाता है और लाइसेंसधारी बंदूकधारियों द्वारा उस पर सटीक निशाना लगाया जाता है। जब तक गोली लगने से नारियल फूटकर नीचे नहीं गिरता, तब तक भुजरियों का विसर्जन नहीं किया जाता है।

🎯 300-400 फीट ऊंचे पेड़ पर बंधे नारियल पर साधते हैं निशाना, गूंजते हैं जयकारे

भुजरिया पर्व के इस विशेष आयोजन के दौरान एक तरफ जहाँ ग्रामीण महिलाएं पारंपरिक मंगलगीत गाती हैं और लोक संस्कृति के रंग बिखेरती हैं, वहीं दूसरी तरफ गांव के लाइसेंसशुदा बंदूकधारी अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए आगे आते हैं। जमीन से इतनी अधिक ऊंचाई पर बंधे नारियल को बंदूक से साधना किसी आसान चुनौती से कम नहीं होता। एक-एक करके निशानेबाज अपनी बंदूकों से निशाना लगाते हैं और मौके पर मौजूद सैकड़ों लोगों की निगाहें आसमान में टिकी रहती हैं। जैसे ही किसी निशानेबाज की गोली से नारियल टूटकर नीचे गिरता है, पूरा इलाका माता के जयकारों और हर्षोल्लास से गूंज उठता है, जिसके बाद ही भुजरियों को विसर्जन के लिए तालाब या नदी की ओर ले जाया जाता है।

🛡️ आस्था और परंपरा के साथ सुरक्षा मानकों का भी रखा जाता है पूरा ध्यान

प्राचीन काल से चली आ रही इस लोक मान्यता के पीछे हथियारों के इस्तेमाल और सुरक्षा से जुड़े ऐतिहासिक कारण बताए जाते हैं। झूकरजोगी में इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए आसपास के दर्जनों गांवों से भारी भीड़ उमड़ती है, जो लोगों के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारी कौतूहल का विषय भी रहता है। इस परंपरा के बारे में निशानेबाज पवन सिंह राजपूत का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखकर उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना है। हालांकि, आधुनिक दौर में इस परंपरा को निभाते समय हथियारों से जुड़े सभी कानूनी प्रावधानों और सुरक्षा मानकों का पूरी सख्ती से पालन किया जाता है, ताकि आस्था और संस्कृति के साथ सुरक्षा भी बनी रहे।

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