मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं से हर साल होती हैं 13 हजार मौतें, न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने दिए सख्त निर्देश
मध्य प्रदेश में सड़क हादसों को रोकने के लिए 'जीरो फेटलिटी डिस्ट्रिक्ट' प्रोग्राम का विस्तार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट कमेटी की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं।
मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली अकाल मौतों के आंकड़ों को कम करने के लिए प्रशासन ने अब कमर कस ली है। इसके तहत राज्य के चुनिंदा जिलों में सफलता पूर्वक संचालित हो रहे ‘जीरो फेटलिटी डिस्ट्रिक्ट’ प्रोग्राम का अब और अधिक विस्तार किया जाएगा। वर्तमान में धार, सतना, रीवा, सागर, जबलपुर और खरगोन में चल रहे इस प्रभावी कार्यक्रम को अब राजधानी भोपाल, आर्थिक राजधानी इंदौर और उज्जैन जैसे प्रमुख जिलों में भी लागू किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) और हादसों के सटीक कारणों का विस्तृत विश्लेषण कर ऐसी पुख्ता कार्ययोजना तैयार करना है, जिससे भविष्य में एक ही स्थान या एक ही वजह से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति को पूरी तरह रोका जा सके।
⚖️ मंत्रालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक, न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने दिए 'फोर ई' पर फोकस करने के निर्देश
यह अहम निर्णय सोमवार को मंत्रालय में सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान लिया गया। बैठक में प्रदेश की मौजूदा सड़क सुरक्षा स्थिति, दुर्घटनाओं के हालिया आंकड़ों और हादसों पर रोक लगाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की गहन समीक्षा की गई। बैठक की शुरुआत में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कमेटी के निर्देशों और सरकार की कार्ययोजना का विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। न्यायमूर्ति सप्रे ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क सुरक्षा के लिए मुख्य चार स्तंभों—इंजीनियरिंग, इमरजेंसी केयर, एनफोर्समेंट और एजुकेशन (फोर ई)—पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम किया जाए।
⛽ गैर-बीमित वाहनों के लिए आएगा 'बीमा नहीं तो ईंधन नहीं' प्रोजेक्ट, हर साल होती हैं 13 हजार मौतें
सड़क सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए बैठक में कई अभिनव प्रयोगों पर मुहर लगी है। सड़कों पर बिना बीमा के चलने वाले वाहनों की संख्या पर अंकुश लगाने के लिए राज्य के सर्वाधिक गैर-बीमित वाहनों वाले एक जिले में ‘बीमा नहीं तो ईंधन नहीं’ व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा, जिसके तहत पेट्रोल पंपों को वाहन पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा पशुओं के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर समितियां बनाने, हर दुर्घटना की तकनीकी पड़ताल करने और ऑटोमेटिक फिटनेस केंद्रों पर पूरी पारदर्शिता बरतने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में हर साल सड़क हादसों में करीब 13 हजार लोगों की जान जाती है, हालांकि 2026 के पहले छह महीनों में मौतों के आंकड़ों में करीब 800 की कमी दर्ज की गई है।
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