न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़कर होगी 62, एमपी और तमिलनाडु ने किया समर्थन

सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने पर सकारात्मक विचार करने को कहा है। मध्य प्रदेश और हाईकोर्ट इस बढ़ोतरी के पक्ष में हैं।

Sep 02, 2026 - 10:23
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न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़कर होगी 62, एमपी और तमिलनाडु ने किया समर्थन

मध्य प्रदेश में जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने का मार्ग अब लगभग पूरी तरह से साफ हो गया है। देश के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जिला न्यायपालिका के अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 62 वर्ष करने के प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने का निर्देश दिया है। इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई अब आगामी 17 सितंबर को निर्धारित की गई है, जिससे प्रदेश के न्यायिक अधिकारियों में उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।

🏛️ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की फुल कोर्ट का प्रस्ताव पहले ही हो चुका है मंजूर, सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा तर्क

यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहले ही यह बात स्पष्ट की जा चुकी है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की फुल कोर्ट द्वारा न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने के प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायिक अधिकारियों को आम सरकारी कर्मचारियों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। साथ ही, अदालत ने राज्यों के उस वित्तीय बोझ वाले तर्क को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने से आर्थिक संकट की बात कही जा रही थी।

📊 विभिन्न राज्यों का रुख: मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और यूपी-उत्तराखंड की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं

मामले की सुनवाई के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों ने अपनी स्थिति स्पष्ट की:

  • समर्थन करने वाले राज्य: मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना ने जिला न्यायालयों के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के इस ऐतिहासिक कदम का खुलकर समर्थन किया है।

  • आपत्ति जताने वाले राज्य: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ने इस व्यवस्था को लागू करने से प्रशासनिक और वित्तीय बोझ बढ़ने की दलील दी, जबकि नागालैंड ने तर्क दिया कि उनके यहाँ अन्य कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 58 वर्ष है, जिससे संतुलन बिगड़ सकता है। बहरहाल, मध्य प्रदेश सरकार और हाईकोर्ट के इस फैसले के पक्ष में होने के कारण राज्य के जजों को जल्द ही इस बढ़ी हुई आयु सीमा का लाभ मिलने की पूरी उम्मीद है।

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