स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन, 19 गंभीर खामियों मिलने पर सिद्धांता सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का रजिस्ट्रेशन रद्द
स्वास्थ्य विभाग ने भोपाल के सिद्धांता सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया है। जांच में इमरजेंसी और आईसीयू समेत 19 गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।
राजधानी भोपाल के शिवाजी नगर स्थित प्रमुख सिद्धांता सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने एक बहुत बड़ी और सख्त कार्रवाई करते हुए उसका रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की उच्चस्तरीय जांच रिपोर्ट में अस्पताल के संचालन में नियमों की भारी अनदेखी और कुल 19 गंभीर कमियां पाई गईं। इन प्रमुख खामियों में आपातकालीन जीवनरक्षक उपकरणों की कमी, डॉक्टरों की अनुपस्थिति, डायलिसिस व आईसीयू यूनिट में भारी लापरवाही, असुरक्षित एक्स-रे जांच और फायर सेफ्टी से जुड़ी गंभीर चूक शामिल हैं।
🚫 नई भर्तियों पर पूरी तरह रोक, पहले से भर्ती मरीजों की सुरक्षा की दी गई हिदायत
लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद अब यह अस्पताल किसी भी नए मरीज को भर्ती करने या अन्य कोई भी मेडिकल एवं नर्सिंग सेवाएँ देने के लिए अधिकृत नहीं रहेगा। हालांकि, जो मरीज पहले से ही अस्पताल में दाखिल हैं, उनकी सुरक्षा और उनके निर्बाध इलाज की पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की तय की गई है। प्रशासन ने सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी मरीज को बिना किसी सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक डिस्चार्ज या अन्यत्र शिफ्ट नहीं किया जाए, ताकि उनकी जान को किसी प्रकार का जोखिम न हो।
🔍 जांच में सामने आईं चौंकाने वाली अनियमितताएं: इमरजेंसी से लेकर आईसीयू तक बरती गई लापरवाही
स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम को निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कई चौंकाने वाली और खतरनाक अनियमितताएं मिलीं:
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इमरजेंसी लापरवाही: आपातकालीन कक्ष में केवल एक बीपी मशीन और ट्रॉली पर रखा एक ही ऑक्सीजन सिलेंडर मिला। क्रैश कार्ट भी लॉक पाई गई और ट्रॉमा क्षेत्र का उपयोग सामान्य ड्रेसिंग के लिए किया जा रहा था।
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डायलिसिस और आइसोलेशन चूक: चार बेड की डायलिसिस यूनिट में सिर्फ दो टेक्नीशियन मिले, जिनमें से एक के पास वैध शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज नहीं थे। इसके अलावा हेपेटाइटिस B, C और HIV जैसे सीरो-पॉजिटिव मरीजों के लिए कोई अलग आइसोलेशन व्यवस्था नहीं थी।
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क्रॉस-इंफेक्शन का खतरा: आईसीयू में संक्रमित मरीजों के लिए आरक्षित विशेष केबिनों में सामान्य मरीजों को भर्ती किया गया था, जिससे क्रॉस-इंफेक्शन का बड़ा खतरा पैदा हो गया था।
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असुरक्षित एक्स-रे जांच: मोबाइल एक्स-रे यूनिट से नियमों के विरुद्ध मरीजों की जांच की जा रही थी, जिसमें न तो मरीजों को लेड एप्रन पहनाया गया और न ही थायरॉयड कॉलर का उपयोग किया गया।
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