गृह मंत्रालय के इनपुट पर क्राइम ब्रांच का एक्शन, म्यूल अकाउंट के जरिए हो रही थी साइबर ठगी
इंदौर में क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे म्यूल बैंक खाते का खुलासा किया है, जिसके जरिए 15 राज्यों में डेढ़ करोड़ से अधिक की साइबर ठगी की गई है।
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले म्यूल अकाउंट (Mule Account) नेटवर्क के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने बेहद सख्त कार्रवाई की है। शहर के एक 25 वर्षीय युवक के बैंक खाते का कनेक्शन देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों में सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि दिल्ली से लेकर केरल और असम से लेकर राजस्थान तक देश के कुल 15 राज्यों में दर्ज डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी की शिकायतों में इस एक ही बैंक खाते का इस्तेमाल पाया गया है।
🔍 I4C और एनसीआरपी पोर्टल से मिले डेटा के आधार पर हुआ खुलासा, ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत हुई कार्रवाई
इस मामले में क्राइम ब्रांच ने खाताधारक अभिषेक तिवारी के खिलाफ औपचारिक रूप से केस दर्ज कर लिया है। पुलिस को इस खतरनाक अंतरराज्यीय नेटवर्क की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले 'इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर' (I4C), एनसीआरपी (NCRP) पोर्टल और राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय से प्राप्त डेटा की गहन छानबीन के दौरान मिली। 'ऑपरेशन मैट्रिक्स' के तहत पुलिस संदिग्ध म्यूल खातों और उनके संचालकों के रिकॉर्ड का लगातार परीक्षण कर रही है। श्रीगणेश नगर निवासी अभिषेक तिवारी के संदिग्ध खाते की तकनीकी जांच के बाद क्राइम ब्रांच ने यह बड़ा कदम उठाया है।
🌐 15 राज्यों के पीड़ितों के पैसे हुए ट्रांसफर, अब खाते के असली संचालक और नेटवर्क की तलाश में जुटी पुलिस
एडिशनल डीसीपी (अपराध) राजेश दंडोतिया ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि अभिषेक के इस बैंक खाते में दिल्ली, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, असम, बिहार, गुजरात, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना सहित देश के कई राज्यों के साइबर ठगी पीड़ितों के पैसे जमा हुए थे। प्रथम दृष्टया यह साबित हो चुका है कि खाते का उपयोग वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया गया था। अब क्राइम ब्रांच इस बात की गहराई से जाँच कर रही है कि इस खाते का वास्तविक संचालन कौन कर रहा था, इसमें कुल कितनी अवैध रकम आई और उसे आगे किन-किन खातों में ट्रांसफर किया गया। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या अभिषेक ने खुद अपना खाता इस्तेमाल किया या कमीशन के लालच में इसे किसी अन्य साइबर ठग गिरोह को सौंप दिया था।
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