बड़े तालाब के एफटीएल स्तर पर ड्रोन मैपिंग, 347 से अधिक अवैध निर्माणों पर जल्द होगी कार्रवाई

भोपाल के बड़े तालाब का एनजीटी के निर्देशों के बाद नए सिरे से सीमांकन होगा। ड्रोन मैपिंग और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए अवैध निर्माणों की जांच की जाएगी।

Sep 03, 2026 - 11:47
0
बड़े तालाब के एफटीएल स्तर पर ड्रोन मैपिंग, 347 से अधिक अवैध निर्माणों पर जल्द होगी कार्रवाई

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के कड़े निर्देशों के अनुपालन में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक बड़े तालाब के सीमांकन की प्रक्रिया अब एक बार फिर नए सिरे से शुरू की जा रही है। वर्तमान में तालाब का जलस्तर अपने फुल टैंक लेवल (FTL) पर है, जिसके चलते तालाब की वास्तविक सीमा का सटीक और पारदर्शी आकलन करने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। प्रशासन द्वारा इस कार्य के लिए ड्रोन मैपिंग, सैटेलाइट इमेजरी, जियो-टैगिंग, रिमोट सेंसिंग और ग्राउंड ट्रुथिंग जैसी अत्याधुनिक पद्धतियों का उपयोग किया जाएगा ताकि अतिक्रमण की सही स्थिति स्पष्ट हो सके।

📋 3 महीने के भीतर अवैध निर्माणों को करना होगा बेदखल, बफर जोन और वेटलैंड क्षेत्र में निर्माण पर पूरी तरह प्रतिबंध

इससे पहले मार्च से जून के बीच किए गए प्रारंभिक सीमांकन के दौरान कुल 347 अवैध निर्माण चिन्हित किए गए थे, और अब इस नए तकनीकी सर्वे के बाद इस आंकड़े में और अधिक बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है। गठित की गई विशेष समिति को आगामी 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। नए नियमों के मुताबिक, तालाब, वेटलैंड, बफर क्षेत्र और 'जोन ऑफ इन्फ्लुएंस' के दायरे में आने वाले शहरी क्षेत्रों में 50 मीटर तथा ग्रामीण इलाकों में 250 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। सर्वे में चिन्हित किए गए सभी नियम-विरुद्ध निर्माणों को 3 महीने की निश्चित अवधि के भीतर बेदखल करने की कार्रवाई की जाएगी।

⚖️ वेटलैंड रूल्स-2017 के तहत होगी गहन समीक्षा, अवैध निर्माणों को संरक्षण देने वाले लापरवाह अधिकारियों पर भी कसेगा शिकंजा

इस पूरी प्रक्रिया के तहत अतिक्रमण की समीक्षा वर्ष 2022 के स्थान पर पुराने वेटलैंड रूल्स-2017 के आधार पर की जाएगी, जिसका सीधा अर्थ यह है कि साल 2017 के बाद से जितने भी अनधिकृत निर्माण हुए हैं, उन सबकी बारीकी से जाँच होगी। इसमें निर्माण की सटीक तिथि और उस दौरान दी गई अनुमतियों की वैधता की भी पड़ताल की जाएगी। इसके अलावा, नियमों के विरुद्ध जाकर अवैध निर्माणों को स्वीकृति देने वाले या फिर समय रहते उन पर रोक लगाने में नाकाम रहे प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी उच्चस्तरीय जाँच होगी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव को दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User