10 लाख कमीशन लेने के आरोप में घिरे प्रभारी कार्यपालन यंत्री, कई ठिकानों पर दस्तावेजों की जांच
छिंदवाड़ा और बालाघाट में पीडब्ल्यूडी के प्रभारी कार्यपालन यंत्री कमलकिशोर सिंगारे के ठिकानों पर ईओडब्ल्यू ने छापा मारा है। भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कार्रवाई जारी है।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और बालाघाट जिलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की टीमों ने गुरुवार सुबह पौने छह बजे लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रभारी कार्यपालन यंत्री कमलकिशोर सिंगारे के ठिकानों पर एक साथ छापेमार कार्रवाई की। ईओडब्ल्यू ने बालाघाट, छिंदवाड़ा और भोपाल स्थित परिसरों में एक साथ दबिश दी। शुरुआती जांच में अधिकारी के पास भारी मात्रा में बेहिसाब संपत्ति और अवैध रूप से अर्जित संपत्ति होने की जानकारी सामने आ रही है। फिलहाल ईओडब्ल्यू की टीमें दस्तावेजों और बैंक खातों की बारीकी से पड़ताल करने में जुटी हुई हैं।
💰 10 लाख रुपये कमीशन लेने का है गंभीर आरोप, बालाघाट आवास से नकद और स्कॉर्पियो गाड़ी बरामद
ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच के दौरान बालाघाट स्थित आवास से करीब 2 लाख 50 हजार रुपये नकद, एक नई स्कॉर्पियो वाहन और कई खाली लिफाफे बरामद किए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद ईओडब्ल्यू की टीम प्रभारी कार्यपालन यंत्री सिंगारे को बालाघाट से सीधे छिंदवाड़ा स्थित उनके आवास पर भी लेकर पहुँची, जहाँ सघन तलाशी अभियान चलाया गया। यह पूरी कार्रवाई भ्रष्टाचार की एक गंभीर शिकायत के बाद सुनिश्चित की गई है। मध्य प्रदेश सिविल कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी यूनुस खान उर्फ पप्पा भाई ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि यंत्री द्वारा ठेकेदारों को लगातार परेशान किया जा रहा है और एक ठेकेदार छोटू ठाकरे के 30 लाख रुपये के कार्यों पर 10 लाख रुपये का अवैध कमीशन वसूला गया है।
🔍 बंगले का कोना-कोना छाना गया, परिजनों के मोबाइल फोन जब्त कर बैंक लॉकर्स की जांच की तैयारी
बालाघाट में पिछले 14 महीने से प्रभारी कार्यपालन यंत्री के रूप में पदस्थ कमलकिशोर सिंगारे के छिंदवाड़ा स्थित बंगले पर भी ईओडब्ल्यू ने कड़ी सुरक्षा के बीच सघन तलाशी ली। सुरक्षा की दृष्टि से बंगले के बाहर पुलिस का वज्र वाहन और एंबुलेंस भी तैनात कराई गई थी। कार्रवाई के दौरान ईओडब्ल्यू ने घर के सदस्यों के सभी मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए हैं ताकि किसी भी तरह के डिजिटल साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके। ईओडब्ल्यू के डीएसपी मनजीत सिंह ने बताया कि तीनों स्थानों पर एक साथ जाँच चल रही है और जब तक पूरी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक बरामद संपत्ति और दस्तावेजों को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट करना जल्दबाजी होगी।
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