MCU भोपाल में एडमिशन प्रक्रिया पर विवाद, छात्रों से माफीनामा मांगने का आरोप, यूजीसी में शिकायत
माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल की प्रवेश प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। आरटीआई खुलासे के बाद छात्र ने हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
मध्य प्रदेश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल की स्नातकोत्तर प्रवेश प्रक्रिया इन दिनों भारी विवादों और सवालों के घेरे में आ गई है। विश्वविद्यालय के एमए (एमसी) और एमए (एपीआर) पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर विश्वविद्यालय के छात्र और पूर्व एनएसयूआई प्रदेश प्रवक्ता तनय शर्मा ने इसकी पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। दरअसल, सूचना का अधिकार (RTI) के तहत माँगी गई जानकारी में विश्वविद्यालय की ओर से यह बताया गया है कि उनके पास इंटरव्यू (साक्षात्कार) की स्कोर शीट संधारित ही नहीं है। चयन सूची में अभ्यर्थियों के अंक न होने और साक्षात्कार पैनल की जानकारी को गोपनीय व संवेदनशील बताए जाने के बाद अब इस मामले ने तूल पकड़ लिया है।
📊 इंटरव्यू के अंक और रिकॉर्ड न होने पर पारदर्शिता पर सवाल, माफीनामा मांगने का भी दावा
तनय शर्मा ने प्रवेश प्रक्रिया में सबसे बड़ा सवाल साक्षात्कार के मूल्यांकन और उसके अंकों को लेकर उठाया है। उनका कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया में इंटरव्यू के आधार पर अंक दिए गए, लेकिन आरटीआई के जवाब में विश्वविद्यालय ने मूल्यांकन पत्र या अंक तालिका उपलब्ध न होने की बात कही, जिससे यह साफ नहीं हो पा रहा कि अभ्यर्थियों को किस आधार पर नंबर दिए गए। इसके अलावा, जारी चयन सूची में न तो अभ्यर्थियों के प्राप्तांक दर्ज हैं और न ही उस पर किसी जिम्मेदार अधिकारी के हस्ताक्षर हैं। छात्र का यह भी गंभीर आरोप है कि चयन सूची आने के बाद जब वे दस्तावेज सत्यापन के लिए पहुँचे, तो उनसे एक ऐसे माफीनामे पर हस्ताक्षर करने को कहा गया जिसमें 'कृपा पूर्वक प्रवेश दिया जाए' जैसी बातें लिखी थीं, जिसका उन्होंने कड़ा विरोध किया।
⚖️ लोकपाल का पद रिक्त होने के बाद यूजीसी में शिकायत, अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जाने की तैयारी
छात्र नेता का कहना है कि वे इस पूरे मामले को विश्वविद्यालय के लोकपाल के सामने रखना चाहते थे, लेकिन पिछले करीब चार महीने से विश्वविद्यालय में लोकपाल का पद रिक्त होने के कारण उन्हें न्याय का अवसर नहीं मिल सका। इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) में औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है। अब विश्वविद्यालय स्तर पर उचित समाधान न मिलने की स्थिति में उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर खंडपीठ में रिट याचिका दायर करने की चेतावनी दी है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
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