हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के सघन वन प्रोजेक्ट पहुंचे कलेक्टर, 859 हेक्टेयर में हो रहा पौधारोपण

रतलाम कलेक्टर अजय कटेसरिया ने शिवगढ़ वन क्षेत्र का पैदल निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने तालाब का बारिश का पानी पीकर उसकी तुलना हिमालय के पानी से की है।

Sep 05, 2026 - 10:28
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हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के सघन वन प्रोजेक्ट पहुंचे कलेक्टर, 859 हेक्टेयर में हो रहा पौधारोपण

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से कलेक्टर अजय कटेसरिया की एक दिलचस्प तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें वे शिवगढ़ वन क्षेत्र के एक तालाब का पानी सीधे पीते हुए नजर आ रहे हैं। कलेक्टर ने हाल ही में शिवगढ़ वन क्षेत्र में विकसित हो रहे सघन वन प्रोजेक्ट का जायजा लेने के लिए करीब 6 किलोमीटर तक पैदल चलकर पूरा निरीक्षण किया। इसी दौरान निरीक्षण के बीच कलेक्टर ने तालाब में एकत्रित हुए बारिश के स्वच्छ पानी को हाथों में लेकर पिया और उसका स्वाद चखते हुए उसकी तुलना सीधे हिमालय के प्राकृतिक और शुद्ध पानी से की।

💧 859 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित हो रहा सघन वन, 2 लाख पौधों के साथ बन रहे 56 चेक डैम

कलेक्टर अजय कटेसरिया हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट द्वारा शिवगढ़ वन परिक्षेत्र में चलाए जा रहे सघन वन एवं जल संरक्षण कार्यों का जायजा लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पूरे वन क्षेत्र का पैदल भ्रमण किया, पौधारोपण किया और जल संरक्षण के लिए बनाई जा रही संरचनाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के कार्यकर्ता सुनील सोनी ने जानकारी दी कि इस प्रोजेक्ट के तहत 859 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 2 लाख पौधों का रोपण किया गया है। इसके अलावा, पानी को रोकने के लिए 56 चेक डैम भी बनाए जा रहे हैं, जिससे लगभग 45 करोड़ लीटर पानी संरक्षित किया जा सकेगा और आसपास के 14 गांवों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

👥 स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता और रोजगार पर जोर, छुट्टी के दिन अधिकारियों ने किया औचक निरीक्षण

शुक्रवार की छुट्टी के दिन आदिवासी अंचल शिवगढ़ पहुंचे कलेक्टर ने जल संरक्षण के लिए किए जा रहे इन तमाम विकास कार्यों की जमकर सराहना की। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इस पूरी परियोजना में स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी होना बेहद जरूरी है ताकि पर्यावरण में सुधार के साथ-साथ ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी मिल सकें। इस प्रोजेक्ट के तहत स्थानीय समुदाय की मदद से 3 लाख से अधिक पौधों की एक बड़ी नर्सरी भी तैयार की गई है, जो इस पूरे इलाके की आबोहवा बदलने में अहम भूमिका निभा रही है।

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