लंदन में CJI सूर्यकांत ने आर्थिक अपराधों पर जताई चिंता, कहा—100 में से 1 रुपये से भी कम हो पाती है रिकवरी

दुनियाभर में मनी लॉन्ड्रिंग और काला धन बढ़कर 4.4 ट्रिलियन डॉलर हो गया है। लंदन में आयोजित सिम्पोजियम में CJI सूर्यकांत ने आर्थिक अपराधों पर चिंता जताई है।

Sep 04, 2026 - 19:21
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लंदन में CJI सूर्यकांत ने आर्थिक अपराधों पर जताई चिंता, कहा—100 में से 1 रुपये से भी कम हो पाती है रिकवरी

दुनियाभर में काले धन और आर्थिक अपराधों का कारोबार लगातार खतरनाक रफ्तार से बढ़ रहा है। इसकी विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2025 में दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए घूमने वाला काला धन करीब 4.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया है। भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने इस বিপুল रकम की तुलना करते हुए कहा है कि अगर वैश्विक स्तर पर काले धन के अनुमान मोटे तौर पर भी सही माने जाएँ, तो इस कुल रकम से दुनिया की करीब 8 अरब आबादी के प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक साधारण लैपटॉप खरीदा जा सकता है और इसके बावजूद काफी पैसा बच जाएगा। CJI ने यह अहम टिप्पणी लंदन में आयोजित 43वें इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन इकोनॉमिक क्राइम को संबोधित करते हुए की।

📉 सिर्फ 1 फीसदी से भी कम हो पाती है रिकवरी, अवैध पैसों का कारोबार ग्लोबल जीडीपी से भी तेज

आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2023 में दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी रकम लगभग 3.1 ट्रिलियन डॉलर थी, जो महज दो साल यानी 2025 में बढ़कर 4.4 ट्रिलियन डॉलर हो गई। इसके चलते वैश्विक जीडीपी में अवैध पैसों का हिस्सा 2.9 फीसदी से बढ़कर 3.8 फीसदी तक पहुँच गया है। इस समस्या के गंभीर होने की मुख्य वजह यह है कि सरकार और जाँच एजेंसियाँ अवैध तरीके से कमाई गई कुल संपत्ति का बहुत ही छोटा हिस्सा बरामद कर पाती हैं। CJI के अनुसार, सबसे उदार अनुमानों के हिसाब से भी हर 100 रुपये की अवैध संपत्ति में से 1 रुपये से भी कम की रिकवरी हो पाती है। इसका मतलब साफ है कि अवैध संपत्ति के 100 हिस्सों में से 99 हिस्से केवल कागजी रिपोर्टों और भाषणों में ही सिमट कर रह जाते हैं।

🇮🇳 भारत में भी बढ़ रहे आर्थिक अपराध और फ्रॉड के मामले, सीमा पार छिपाया जाता है काला धन

भारत की बात करें तो देश में दर्ज होने वाले आर्थिक अपराधों की संख्या 2018 के 1,56,268 मामलों से बढ़कर 2024 में 2,14,379 हो गई है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों में फ्रॉड से जुड़े आंकड़े भी चिंताजनक हैं, जहाँ वित्त वर्ष 2025-26 में फ्रॉड की रकम 47,910 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जबकि रिकवरी केवल 6.1 फीसदी यानी करीब 2,906 करोड़ रुपये ही हो सकी। CJI सूर्यकांत ने इस बात पर भी जोर दिया कि काले धन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उस देश में नहीं रुकता जहाँ अपराध के जरिए कमाया जाता है, बल्कि अपराधी इसे दूसरे देशों में ट्रांसफर कर देते हैं। यही वजह है कि इस वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए विभिन्न देशों की जाँच एजेंसियों और न्यायपालिकाओं के बीच आपसी तालमेल बेहद जरूरी है।

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