मिट्टी की मूर्तियों से बड़वानी में गणेशोत्सव की तैयारी, जानें क्यों महंगी हुईं प्रतिमाएं और क्या बोले आयोजक

बड़वानी में पीओपी की मूर्तियों पर प्रतिबंध के बाद इस बार इको-फ्रेंडली मिट्टी के गणेश जी की मांग बढ़ी है। कच्चे माल की वजह से प्रतिमाएं 30% तक महंगी हुई हैं। पूरी खबर पढ़ें।

Sep 11, 2026 - 18:44
0
मिट्टी की मूर्तियों से बड़वानी में गणेशोत्सव की तैयारी, जानें क्यों महंगी हुईं प्रतिमाएं और क्या बोले आयोजक

बड़वानी। इस बार के गणेशोत्सव में बड़वानी शहर से लेकर कस्बों और गांवों तक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। यह बदलाव भले ही मूर्तियों की बनावट और आयोजन के बजट में दिख रहा हो, लेकिन श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था चरम पर है। इस बार प्रशासन ने प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की प्रतिमाओं के निर्माण और बिक्री पर सख्ती से प्रतिबंध लगाया है। साथ ही जहरीले केमिकल रंगों के उपयोग पर भी पूरी रोक है। इसका सकारात्मक असर धरातल पर नजर आ रहा है। मूर्तिकारों ने पीओपी की जगह मिट्टी की पूरी तरह इको-फ्रेंडली प्रतिमाएं तैयार की हैं। इसके चलते विशालकाय मूर्तियों की जगह छोटी और मध्यम आकार की सुंदर प्रतिमाओं का चलन बढ़ा है। वहीं कच्चे माल के महंगे होने से इस वर्ष प्रतिमाएं पिछले साल की तुलना में 25 से 30 प्रतिशत तक महंगी हुई हैं।

🕉️ 14 सितंबर से शुरू होगा गणेशोत्सव, POP की जगह मिट्टी की प्रतिमाओं की बुकिंग तेज

14 सितंबर से प्रारंभ हो रहे गणेश उत्सव को लेकर चारों तरफ गणेश समितियां भव्य पंडालों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। श्रद्धालु अपनी-अपनी पसंद की मूर्तियों की बुकिंग कर रहे हैं। हालांकि महंगाई के कारण मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं की कीमतें पिछले साल की तुलना में काफी बढ़ गई हैं। पिछले वर्ष जो 6 फीट की प्रतिमा करीब 17 हजार रुपये में मिल जाती थी, वह इस बार बढ़कर 25 हजार रुपये तक पहुंच गई है।

बड़वानी के गणेश मंडल के सदस्य रमेश भावसार बताते हैं, "अब केवल अति-भव्य प्रतिमाएं स्थापित करने का समय नहीं है, क्योंकि उसमें लागत काफी अधिक आती है। इस बार हम पंडाल की सजावट में भी फिजूलखर्ची से बच रहे हैं। मूल सार यही है कि गणेश जी का त्योहार पूरी श्रद्धा, भाव और भक्तिपूर्वक मनाया जाए।"

📏 बड़ी मूर्तियों का क्रेज हुआ कम, छोटी और मध्यम आकार की मूर्तियों की मांग बढ़ी

मूर्तिकारों के अनुसार, पिछले वर्ष जो प्रतिमाएं लगभग 7 से 10 हजार रुपये में उपलब्ध थीं, उनके दाम इस बार 13 से 15 हजार रुपये तक पहुंच गए हैं। कीमतों में वृद्धि का सीधा प्रभाव मूर्तियों की साइज और मांग पर पड़ा है। विशालकाय प्रतिमाओं की बुकिंग में गिरावट आई है, जबकि 3 से 6 फीट की छोटी और मध्यम आकार की मूर्तियों की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है। बड़वानी की गणेश उत्सव समितियां अपने कुल बजट और पंडाल की जगह का हिसाब लगाकर ही उपयुक्त आकार की प्रतिमा का चयन कर रही हैं।

🎨 कच्चा माल महंगा होने से बढ़ी लागत, 300 रुपये से लेकर 5 हजार रुपये तक की प्रतिमाएं उपलब्ध

मूर्तिकार गोकुल गोले बताते हैं, "प्रतिमाएं महंगी होने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। प्रतिमा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की दरें काफी बढ़ गई हैं। मिट्टी अब 4 से 5 हजार रुपये प्रति ट्रॉली मिल रही है, वहीं ढांचा तैयार करने वाली रस्सियों की कीमत भी 300 रुपये प्रति बंडल तक पहुंच गई है। मिट्टी, लकड़ी के ढांचे, सुतली, प्राकृतिक रंग और परिवहन लागत सब महंगे होने से मूर्तियों की कीमत बढ़ाना मजबूरी हो गया है।"

उन्होंने बताया कि उनके पास 300 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की सुंदर प्रतिमाएं उपलब्ध हैं, जिन्हें तैयार करने में कई दिनों की कठोर मेहनत लगी है।

🎪 बड़वानी के गणेश पंडालों पर महंगाई की मार, आयोजकों ने फिजूलखर्ची पर लगाई लगाम

गणेश पंडाल भले ही सादगी भरे हों और बजट सीमित हो, लेकिन "गणपति बप्पा मोरया" की गूंज और भक्तों की श्रद्धा हमेशा की तरह अटूट है। बड़वानी में गणेश उत्सव को लेकर युवाओं में भारी उत्साह है, लेकिन बढ़ती कीमतों ने आयोजकों का बजट बिगाड़ दिया है। शहर के गणेश मंडलों का कहना है कि मूर्ति, सजावट, टेंट, साउंड और लाइटिंग व्यवस्था पर पहले से अधिक खर्च हो रहा है, जिसे संतुलित करने के लिए इस बार तामझाम और अनावश्यक खर्चों में कटौती की जा रही है।

  • धरोहर गणेश मंडल के लव जैमन का कहना है: "युवाओं में खासा उत्साह है, लेकिन बजट सीमित रखने के लिए इस बार अत्यधिक दिखावे से बचा जा रहा है।"

  • थाना चौराहा राजा फ्रेंड्स ग्रुप के हितेश अग्रवाल ने कहा: "सजावट के अन्य एक्स्ट्रा खर्च काटकर बजट को एडजस्ट किया जा रहा है।"

  • गणेश भक्त रमेश पांचाल का मानना है: "महंगाई हर क्षेत्र में है, इसलिए पंडालों में अनावश्यक व्यय कम करके परंपरा निभाई जा रही है।"

  • कारंजा के वक्रतुंड यूथ एसोसिएशन के अमन पवार और विघ्नहर्ता यूनिटी मोटी माता क्षेत्र समिति के सदस्यों ने भी माना कि आस्था सर्वोपरि है, लेकिन सीमित साधनों में आयोजन संपन्न कराना इस बार बड़ी चुनौती है।

🌱 क्यों खास और श्रेष्ठ हैं मिट्टी के बने गणेश जी?

मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं की परंपरा केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी सनातन संस्कृति और प्रकृति के प्रति गहरा सम्मान दर्शाती है। भगवान गणेश बुद्धि, विघ्नहर्ता और शुभता के प्रतीक हैं।

मिट्टी से निर्मित प्रतिमा में स्वाभाविक पवित्रता होती है। इसकी शास्त्रोक्त पूजा-अर्चना से घर और पंडाल में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है तथा नकारात्मकता दूर होती है। यह इस महान आध्यात्मिक दर्शन का भी स्मरण कराती है कि हमारा शरीर पंचतत्वों से मिलकर बना है और अंततः उसी में विलीन होना है। इसके अलावा, केमिकल पेंट और सिंथेटिक पदार्थों से मुक्त होने के कारण मिट्टी की प्रतिमाएं जलस्रोतों और पर्यावरण के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित हैं।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User