विकास के दावों की खुली पोल! एंबुलेंस नहीं पहुंची तो बैलगाड़ी से घर ले जाना पड़ा महिला का शव
शहडोल के ब्यौहारी में सड़क बदहाल होने के कारण एंबुलेंस गांव के बाहर ही रुक गई। मजबूरी में परिजनों को बुजुर्ग महिला का शव बैलगाड़ी से घर पहुंचाना पड़ा।
शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के ब्यौहारी से एक बेहद शर्मनाक और व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाली तस्वीर सामने आई है, जो दावों की धरातलीय हकीकत को बयां कर रही है। 21वीं सदी के इस दौर में भी कई ग्रामीण इलाकों में बुनियादी इमरजेंसी सेवाएं तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
आलम यह है कि रास्ते पर कीचड़ और बदहाली के कारण एक बुजुर्ग महिला के निधन के बाद उनके शव को अंतिम संस्कार के लिए घर तक पहुंचाने के लिए परिजनों को बैलगाड़ी का सहारा लेना पड़ा। यह दुखद घटना शहडोल जिले की ब्यौहारी जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत आखेटपुर के वार्ड नंबर 1 की है।
🏥 नागपुर में इलाज के दौरान हुआ था महिला का निधन: गांव पहुंचने पर रास्ते के दलदल में फंसी एंबुलेंस
जानकारी के अनुसार, डाला टोला की रहने वाली 70 वर्षीय श्यामकली पटेल का नागपुर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। इसी दौरान इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
शनिवार सुबह परिजन किराए की एंबुलेंस से शव को लेकर अपने पैतृक गांव पहुंचे। लेकिन गांव में स्थित घर से करीब 1 किलोमीटर पहले ही चालक को एंबुलेंस रोकनी पड़ी, क्योंकि आगे का पूरा रास्ता घुटनों तक कीचड़ और दलदल में तब्दील हो चुका था। मजबूरी में परिजनों को शव को एंबुलेंस से उतारकर बैलगाड़ी पर रखना पड़ा और लगभग 1 किलोमीटर तक कीचड़ भरे रास्ते से बैलगाड़ी हांककर शव को घर तक पहुंचाया गया।
📢 'इससे शर्मनाक और क्या हो सकता है': जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र पटेल ने प्रशासन को घेरा
सड़क निर्माण की लगातार उपेक्षा पर जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र पटेल ने गहरा आक्रोश जताया है। उन्होंने कहा, "सड़क निर्माण के लिए ग्रामीणों ने दर्जनों बार शासन-प्रशासन के आला अधिकारियों को लिखित में अवगत कराया है। मैंने खुद भी कई बैठकों में इस बदहाल रास्ते के बारे में मुद्दा उठाया, लेकिन आज तक सड़क निर्माण शुरू नहीं हो सका।"
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में भी पुष्पेंद्र पटेल इस दयनीय स्थिति पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि "मुख्य मार्ग से घर तक सड़क न होने की वजह से एंबुलेंस को 1-2 किलोमीटर दूर खड़ा करना पड़ा और परिजन बैलगाड़ी से शव ले जाने को मजबूर हुए, किसी भी जिम्मेदार व्यवस्था के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक बात और क्या हो सकती है।"
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