डॉक्टरों का चमत्कार! सिर के आर-पार घुसा सरिया निकाला, 2 घंटे चली सर्जरी से बची जान
रतलाम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने 2 घंटे की जटिल सर्जरी कर मरीज के सिर के आर-पार घुसा सरिया निकाला और उसकी जान बचाई।
रतलाम। मेडिकल कॉलेज रतलाम के शल्य चिकित्सा (सर्जरी) विभाग के डॉक्टरों की एक अनुभवी टीम ने अत्यंत जटिल और संवेदनशील ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर एक व्यक्ति को नया जीवन दिया है।
मंदसौर जिले के सीतामऊ निवासी मरीज परमानंद एक निर्माणाधीन मकान के पास बने गहरे गड्ढे में अचानक गिर गए थे, जिससे एक तीखा लोहे का सरिया उनके सिर में आर-पार घुस गया था। गंभीर और नाजुक हालत में उन्हें पहले स्थानीय सीतामऊ और फिर मंदसौर के अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें रतलाम मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। डॉक्टरों की टीम ने लगातार 2 घंटे तक चले जोखिम भरे ऑपरेशन के बाद सरिया निकालकर मरीज को मौत के मुंह से बाहर निकाला।
🏗️ निर्माणाधीन मकान के गड्ढे में गिरने से हुआ हादसा: सिर के बाएं हिस्से से कान के पास निकला सरिया
घटनाक्रम के अनुसार, सीतामऊ निवासी परमानंद (पिता नागुलाल, उम्र 41 वर्ष) निर्माणाधीन मकान के पास संतुलन बिगड़ने से गड्ढे में गिर गए थे।
गड्ढे में उल्टा गिरने के कारण लोहे का सरिया उनके सिर के बाएं हिस्से में घुसकर कान के पास से आर-पार निकल गया था। परिजनों द्वारा उन्हें तत्काल शासकीय अस्पताल सीतामऊ ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति के कारण मेडिकल कॉलेज मंदसौर भेजा गया। वहां भी इस प्रकार की जटिल न्यूरो-सर्जरी के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध न होने पर मरीज को रतलाम मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
⏱️ 2 घंटे तक चली जोखिम भरी सर्जरी: डॉक्टरों की त्वरित कार्रवाई से खतरे से बाहर हुआ मरीज
सर्जरी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. प्रवीण सिंह बघेल ने बताया कि, "मरीज को 12 सितंबर को दोपहर करीब 1:50 बजे अत्यंत गंभीर अवस्था में रतलाम मेडिकल कॉलेज लाया गया था। सरिया मस्तिष्क के बेहद संवेदनशील हिस्से से होकर गुजरा था, जिससे जरा सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती थी।
सर्जरी विभाग के डॉक्टरों की विशेष टीम ने बिना समय गंवाए 2 घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया और सिर में फंसा पूरा सरिया सुरक्षित बाहर निकाल लिया।"
🏥 क्षेत्रवासियों के लिए बड़ी राहत: अब गंभीर और इमरजेंसी इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा बड़े शहर
डॉ. प्रवीण सिंह बघेल ने आगे बताया कि, "मरीज परमानंद अब पूरी तरह से खतरे से बाहर हैं और उनकी स्थिति स्थिर है। समय पर सही सर्जरी मिल जाने से मरीज की जान बचाई जा सकी। रतलाम में पहली बार इस प्रकार का अत्यंत जटिल और आकस्मिक ऑपरेशन किया गया है।
रतलाम मेडिकल कॉलेज की इस ऐतिहासिक सफलता से रतलाम, मंदसौर और आसपास के ग्रामीण अंचलों के मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब ऐसे गंभीर मामलों के लिए मरीजों को इंदौर या अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।"
👨⚕️ इस सफल ऑपरेशन में शामिल रही डॉक्टरों की पूरी टीम
इस बेहद जटिल और सफल ऑपरेशन को संपन्न करने में शल्य चिकित्सा विभाग के डॉ. प्रवीण सिंह बघेल (डेजिग्नेटेड प्रोफेसर), डॉ. देवेंद्र चौहान (एसोसिएट प्रोफेसर), डॉ. शैलेंद्र नरगेश (असिस्टेंट प्रोफेसर), डॉ. पिंकी (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. शिवम तोमर (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. सजल यादव, डॉ. आशीष मेरावंडिया, डॉ. प्रसून, डॉ. स्नेहा एवं संपूर्ण मेडिकल व नर्सिंग स्टाफ का सराहनीय योगदान रहा।
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