MGM मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर बेटी ने इंसुलिन लेकर किया सुसाइड का प्रयास; सीनियर डॉक्टरों पर रैगिंग का आरोप

इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज की जूनियर डॉक्टर सिमी यादव ने इंसुलिन का इंजेक्शन लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया। परिजनों ने सीनियर डॉक्टरों पर रैगिंग का आरोप लगाया है।

Sep 21, 2026 - 18:54
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MGM मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर बेटी ने इंसुलिन लेकर किया सुसाइड का प्रयास; सीनियर डॉक्टरों पर रैगिंग का आरोप

हेड कांस्टेबल की डॉक्टर बेटी ने किया आत्महत्या का प्रयास, रैगिंग और प्रताड़ना के गंभीर आरोप

इंदौर : इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। हेड कांस्टेबल की डॉक्टर बेटी ने इंसुलिन का इंजेक्शन लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। एमटीएच अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में पीजी प्रथम वर्ष की जूनियर रेसिडेंट डॉक्टर सिमी यादव की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। घटना के बाद पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर का बयान दर्ज किया है। वहीं, सिमी के पिता हेड कांस्टेबल करण सिंह यादव ने सीनियर डॉक्टरों पर बेटी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, रैगिंग करने और जरूरत से ज्यादा ड्यूटी कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पिता का कहना है कि बेटी की प्रताड़ना को लेकर पहले भी शिकायत की गई थी, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है।

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एमटीएच अस्पताल में उस वक्त हड़कंप मच गया पीजी प्रथम वर्ष की जूनियर रेसिडेंट डॉक्टर सिमी यादव ने इंसुलिन का इंजेक्शन लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। सिमी प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में पदस्थ हैं। हालत बिगड़ने के बाद उन्हें तत्काल एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस भी अस्पताल पहुंची और डॉक्टर का बयान दर्ज किया। इस पूरे मामले ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की कार्य परिस्थितियों और कथित रैगिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिमी के पिता और बीना ट्रैफिक विभाग में पदस्थ हेड कांस्टेबल करण सिंह यादव ने सीनियर डॉक्टरों पर बेटी को लगातार प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। परिवार का आरोप है कि सिमी से निर्धारित ड्यूटी से कहीं ज्यादा घंटे काम कराया गया। परिजनों के मुताबिक पीजी डॉक्टरों के लिए महीने में 192 घंटे की ड्यूटी का रोस्टर निर्धारित है, जबकि सिमी से कथित तौर पर करीब 392 घंटे तक काम कराया गया। परिवार का दावा है कि ड्यूटी रोस्टर से जुड़े दस्तावेज भी उनके पास मौजूद हैं।

परिजनों का आरोप है कि सिमी से शुरुआत में लगातार 36-36 घंटे की ड्यूटी कराई जाती थी। बाद में 12 घंटे का रोस्टर जारी किया गया, लेकिन आरोप है कि कई बार ड्यूटी रात 10 बजकर 30 मिनट, 11 बजे और यहां तक कि 12 बजे तक खिंचती रही। परिवार का कहना है कि सिमी लगातार अपनी परेशानी माता-पिता को बताती थी। पिता करण सिंह यादव के मुताबिक बेटी को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने की शिकायत विभाग में पहले भी की गई थी, लेकिन परिवार की सुनवाई नहीं हुई। परिजनों ने जूनियर डॉक्टरों के साथ रैगिंग और गैर-चिकित्सीय काम करवाए जाने के भी आरोप लगाए हैं। परिवार के मुताबिक 36 घंटे की लगातार ड्यूटी के दौरान कुछ मिनट के लिए वॉशरूम जाने पर भी सीनियर डॉक्टर फोन कर पूछते थे कि डॉक्टर कहां है और काम कौन कर रहा है। सिमी यादव ने 14 फरवरी को एमजीएम मेडिकल कॉलेज में पीजी प्रथम वर्ष में दाखिला लिया था। उन्होंने उज्जैन के आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की है।

वीओ पुलिस के मुताबिक डॉक्टर और उनके परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के लिए कमेटी गठित की गई है, जो पूरे मामले की पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। फिलहाल एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में जांच रिपोर्ट के बाद ही साफ होगा कि रैगिंग, मानसिक प्रताड़ना, अतिरिक्त ड्यूटी और गैर-चिकित्सीय काम करवाने के लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल डॉक्टर सिमी यादव का एमवाय अस्पताल में इलाज जारी है।

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