Panna News: वन भूमि के नक्शे में फंसा धनगढ़ गांव; 70 वर्षों से ग्रामीण लगा रहे गुहार, कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचे सैकड़ो लोग
पन्ना के ग्राम धनगढ़ के ग्रामीणों ने कलेक्टर जनसुनवाई में लगाई गुहार। 70 वर्षों से गांव वन भूमि के नक्शे में दर्ज, विकास कार्य और बोरवेल लगवाने में आ रही बाधा।
पन्ना। जिले की जनसुनवाई में उस समय हड़कंप मच गया, जब बराछ पंचायत के धनगढ़ ग्राम से आए सैकड़ों ग्रामीण अपनी 70 साल पुरानी पीड़ा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि उनका गांव असल में एक 'राजस्व ग्राम' है, लेकिन प्रशासनिक गलती के कारण इसे 'वन भूमि' के नक्शे में दर्ज कर दिया गया है। इस विसंगति के कारण न केवल ग्रामीणों को अपने ही खेतों में बोरवेल लगवाने के लिए वन विभाग की अनुमति लेनी पड़ती है, बल्कि गांव में मूलभूत विकास कार्य भी ठप पड़े हैं।
🚧 विकास कार्यों में आ रही बाधा
ग्रामीण संतोष प्रजापति ने बताया कि वर्ष 1956 से ही वे गांव को वन भूमि के नक्शे से हटाने की मांग कर रहे हैं। गांव में करीब 1000 लोग निवास करते हैं और यहाँ हाई स्कूल व आदिम जाति कल्याण विभाग का छात्रावास भी स्थित है। इसके बावजूद, गांव के किनारे और कुछ हिस्सों में वन विभाग के मुनारे लगे हुए हैं, जो विकास कार्यों में बड़ी अड़चन पैदा कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अपने खेतों के लिए भी वन विभाग के चक्कर काटने पड़ते हैं।
📋 क्या कहते हैं नियम और विभाग?
धनगढ़ ग्राम के ग्रामीणों के पास राजस्व पट्टे उपलब्ध होने के बावजूद, नक्शे में नाम दर्ज होने से वे मूलभूत सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। इस मामले में पन्ना के रेंजर अजय बाजपेई ने बताया कि, "यह विषय अभी संज्ञान में लाया गया है। जैसे ही संबंधित आवेदन और पत्र प्राप्त होता है, विभागीय जांच की जाएगी और नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।"
⚖️ ग्रामीणों को प्रशासन से उम्मीद
सैकड़ों की संख्या में आए ग्रामीणों ने पन्ना कलेक्टर से निवेदन किया है कि उनकी सात दशक पुरानी इस मांग को अब गंभीरता से लिया जाए। ग्रामीणों का तर्क है कि जब उनके पास पट्टे हैं और यह राजस्व ग्राम की श्रेणी में आता है, तो इसे वन भूमि से मुक्त कर उन्हें कानूनी अधिकार मिलने चाहिए। प्रशासन के आश्वासन के बाद ग्रामीण अब उचित कार्रवाई की राह देख रहे हैं।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)