MP Jal Jeevan Mission: अब गांवों में भी देना होगा पानी का टैक्स; पंचायतें वसूलेंगी 100-120 रुपये प्रतिमाह

मध्य प्रदेश में नल-जल योजना के संचालन हेतु नए नियम जारी। गांवों में पंचायतें वसूलेंगी जल कर, पानी की बर्बादी पर लगेगा जुर्माना। जानें नए कनेक्शन और शुल्क की पूरी जानकारी।

Jun 26, 2026 - 15:53
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MP Jal Jeevan Mission: अब गांवों में भी देना होगा पानी का टैक्स; पंचायतें वसूलेंगी 100-120 रुपये प्रतिमाह

भोपाल। 'जल जीवन मिशन' के तहत प्रदेश के गांवों में घर-घर पहुंचे नल-जल का संचालन अब और अधिक व्यवस्थित होगा। राज्य शासन ने 'मध्य प्रदेश पंचायत नल जल योजना संचालन, संधारण एवं प्रबंधन नियम 2026' जारी कर दिए हैं। इसके तहत पंचायतों को न केवल योजना के रखरखाव और बिजली बिल भुगतान की जिम्मेदारी दी गई है, बल्कि उन्हें उपभोक्ताओं से जल कर (Water Tax) वसूलने का अधिकार भी मिल गया है।

💰 जल कर का नया फार्मूला और जुर्माने के प्रावधान

सरकार ने जल कर के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस जारी की हैं:

  • मासिक शुल्क: सामान्य ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए 100 से 120 रुपये प्रतिमाह और आदिवासी विकासखंडों में 60 रुपये प्रतिमाह शुल्क निर्धारित किया गया है।

  • जुर्माना: पानी का दुरुपयोग (गाड़ी धोना, सिंचाई, या मोटर लगाना) करते पाए जाने पर 100 से 500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

  • कनेक्शन शुल्क: नया कनेक्शन लेने के लिए एससी-एसटी परिवारों को 1,000 रुपये और अन्य परिवारों को 2,500 रुपये का भुगतान करना होगा। व्यावसायिक कनेक्शन के लिए यह राशि 8,000 रुपये तय की गई है।

📋 पंचायतों की नई जिम्मेदारी और 'पानी समिति'

नए नियमों के तहत हर ग्राम पंचायत में 'पानी समिति' का गठन अनिवार्य होगा। इसके अध्यक्ष सरपंच होंगे और समिति में 50 फीसदी महिलाएं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, रोजगार सहायक और वार्ड प्रतिनिधि शामिल होंगे। पंचायतों की मुख्य जिम्मेदारी होगी:

  • पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच।

  • पाइपलाइन के रखरखाव और मरम्मत का प्रबंधन।

  • नल जल संचालन के लिए ऑपरेटर की नियुक्ति।

  • भुगतान न करने वाले उपभोक्ताओं का कनेक्शन काटना।

⏱️ पारदर्शी प्रक्रिया: 30 दिन में मिलेगा कनेक्शन

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पानी का कनेक्शन आवेदन की तारीख से 30 दिनों के भीतर देना अनिवार्य होगा। पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पीएचई (PHE) विभाग की लैब में नियमित जांच होगी। यदि पानी दूषित पाया जाता है, तो सप्लाई तत्काल बंद कर सुधार कार्य करना होगा। यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की फिजूलखर्ची रोकने और स्थायी जल प्रबंधन के उद्देश्य से लागू की गई है।

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