Chhindwara News: छिंदवाड़ा में पहली बार दिखा 'मानसून का डाकिया' जैकोबिन कुकू; जानिए क्यों खास है यह दुर्लभ पक्षी
छिंदवाड़ा की पोआमा नर्सरी में पहली बार देखा गया दुर्लभ 'जैकोबिन कुकू' (चातक) पक्षी। मानसून का संदेशवाहक माना जाने वाला यह प्रवासी पक्षी अफ्रीका से भारत पहुँचा है।
छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा की समृद्ध जैव-विविधता के इतिहास में एक और उपलब्धि जुड़ गई है। पहली बार जिले के पोआमा नर्सरी परिसर में 'जैकोबिन कुकू' (Jacobin Cuckoo) पक्षी देखा गया है, जिसे लोक कथाओं में 'चातक' और 'मानसून का पोस्टमैन' कहा जाता है। पक्षी विशेषज्ञों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की टीम ने न केवल इस दुर्लभ पक्षी को देखा, बल्कि उसकी उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें भी कैमरे में कैद की हैं।
🐦 चातक: मानसून के आने का प्रतीक
पक्षी विशेषज्ञ मनीषा परिहार के अनुसार, जैकोबिन कुकू का भारतीय साहित्य और लोककथाओं में विशेष महत्व है। माना जाता है कि यह पक्षी केवल वर्षा की बूंदों का जल ग्रहण करता है। यह प्रवासी पक्षी मानसूनी हवाओं के साथ अफ्रीका से अरब सागर पार करके भारत पहुँचता है। इसकी उपस्थिति इस बात का संकेत है कि मानसून अब पूरी तरह सक्रिय होने वाला है और क्षेत्र में अच्छी बारिश होगी।
🧬 प्रकृति का अनूठा 'ब्रूड पैरासिटिज्म'
जैकोबिन कुकू अपनी अनोखी जीवनशैली के लिए जाना जाता है। यह पक्षी अपना घोंसला स्वयं नहीं बनाता, बल्कि 'ब्रूड पैरासिटिज्म' के तहत अपने अंडे अन्य पक्षियों (विशेषकर बैबलर/सातभाई) के घोंसलों में दे देता है। लगभग पांच महीने भारत में बिताने के बाद, सितंबर-अक्टूबर में यह अपने विकसित बच्चों के साथ वापस अफ्रीका लौट जाता है। यह पक्षी जमीन पर कम और पेड़ों व हवा में अधिक समय व्यतीत करता है।
🌳 पोआमा नर्सरी: समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का उदाहरण
वन विभाग द्वारा संचालित पोआमा नर्सरी इस दुर्लभ प्रजाति के लिए एक आदर्श आवास (Habitat) साबित हुई है। विशेषज्ञ मनीष परिहार ने बताया कि नर्सरी में मौजूद विविध वनस्पतियां, प्राकृतिक जल स्रोत और जैविक खाद (केंचुए के बेड) के कारण यहां भोजन की प्रचुरता है। इसी समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के चलते यहां मैगपाय रॉबिन, बुलबुल, पैराडाइज फ्लाईकैचर और कॉमन आयोरा जैसी अनेक प्रजातियां भी देखी गई हैं। यह नर्सरी अब वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है।
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