सड़कों के सुधार के लिए मध्य प्रदेश में लागू हुआ रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम, तैयार होगा हेल्थ कार्ड

मध्य प्रदेश में सड़कों की निगरानी और रखरखाव के लिए 'रेम्स' (RAMS) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे प्रदेश के 70 हजार किलोमीटर सड़क नेटवर्क का हेल्थ कार्ड तैयार होगा।

Sep 05, 2026 - 19:11
Updated: 6 hours ago
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सड़कों के सुधार के लिए मध्य प्रदेश में लागू हुआ रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम, तैयार होगा हेल्थ कार्ड

देश के केंद्र में स्थित मध्य प्रदेश अन्य राज्यों को आपस में जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन यहाँ सड़कों के विशाल नेटवर्क की निगरानी करना अब तक एक बड़ी चुनौती रहा है। अभी तक लोक निर्माण विभाग (PWD) अपने अमले के जरिए कागजों और अनुमानों के आधार पर ही सड़कों की देखरेख करता था। लेकिन अब सरकार ने इसमें बड़ा बदलाव करते हुए जीआईएस तकनीक और नेटवर्क सर्वे व्हीकल (NSV) का उपयोग करने का निर्णय लिया है। इन आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रदेश की सड़कों, पुल और पुलियों की एक डिजिटल कुंडली तैयार की जाएगी, जिससे सड़कों की मजबूती, समय पर मेंटेनेंस और सुधार की आवश्यकता का पता सिर्फ एक क्लिक पर चल सकेगा।

📊 RAMS तकनीक और नेटवर्क सर्वे व्हीकल के जरिए होगा सटीक डेटा विश्लेषण

मध्य प्रदेश में ग्रामीण सड़कों, स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे के कुल 1 लाख 80 हजार किलोमीटर के विशाल नेटवर्क में से पहले चरण में 70 हजार किलोमीटर सड़कों की डिजिटल निगरानी की तैयारी की गई है। इसके लिए 'रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम' (RAMS) का सहारा लिया जा रहा है, जिसमें जीपीएस और सर्वे वाहनों से डेटा जुटाया जाएगा। यह सारा डेटा केंद्र सरकार के भूतल सड़क परिवहन मंत्रालय के मुख्य सर्वर पर अपलोड किया जाएगा, जहाँ विशेषज्ञ इसका विश्लेषण करेंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर सड़कों की सतह की गुणवत्ता, ट्रैफिक लोड, तकनीकी खामियों और सुधार की प्राथमिकताओं को तय करके राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

🩺 हर सड़क का बनेगा डिजिटल हेल्थ कार्ड, हादसों में आएगी कमी

नेशनल हाईवे अथॉरिटी की तर्ज पर शुरू हो रही इस व्यवस्था के तहत प्रदेश की हर सड़क का 'हेल्थ कार्ड' तैयार किया जाएगा। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह का कहना है कि अब तक निगरानी कागजी अनुमानों पर होती थी, लेकिन अब सटीक वैज्ञानिक डेटा का उपयोग किया जाएगा। शुरुआत में करीब 10 हजार किलोमीटर मुख्य मार्गों और हाईवे का डेटा तैयार किया जाएगा, जिसमें लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस आधुनिक प्रणाली से सड़कों के बार-बार खराब होने की समस्या पर लगाम लगेगी और गुणवत्ता सुधरने से सड़क दुर्घटनाओं में भी खासी कमी आएगी।

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