जामुन की गुठलियां बनी ग्रामीणों की कमाई का जरिया; बालाघाट में हर दिन 1000 रुपये तक की हो रही इनकम
बालाघाट के वनांचल में जामुन की गुठलियां ग्रामीणों के लिए बनी रोजगार का साधन। औषधीय गुणों के कारण बाजार में बढ़ी मांग, ग्रामीण कमा रहे हैं रोजाना 1000 रुपये तक।
बालाघाट। आम तौर पर जामुन का फल खाने के बाद उसकी गुठलियां फेंक दी जाती हैं, लेकिन बालाघाट जिले के वनांचल क्षेत्रों में यही गुठलियां अब ग्रामीणों के लिए आजीविका का एक बड़ा साधन बन गई हैं। औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण इन दिनों बाजार में जामुन की गुठलियों की मांग काफी बढ़ गई है, जिससे ग्रामीणों को घर बैठे रोजगार मिल रहा है। ग्रामीण दिन भर जंगलों में जामुन के पेड़ों के नीचे गुठलियां एकत्रित करते हैं, जिससे उन्हें प्रतिदिन 1000 रुपये तक की आय हो रही है।
🧹 जंगल में सफाई, रोजगार में वृद्धि
जामुन की गुठलियां इकट्ठा करने के लिए ग्रामीण जामुन के पेड़ों के नीचे की जमीन को बिल्कुल साफ-सुथरा कर रहे हैं। सुबह होते ही महिला-पुरुष जंगलों में डेरा जमा लेते हैं और बड़ी मेहनत से गुठलियों का संग्रहण करते हैं। ग्रामीण शकुंतला कोहरे ने बताया कि इस सीजन में गांव में अन्य काम न होने के कारण यह गुठलियां उनके भरण-पोषण का एकमात्र विकल्प बन गई हैं। इससे मिली राशि उनके घर की रसोई चलाने में बड़ी मदद कर रही है।
🌿 औषधीय गुणों का खजाना
आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार, जामुन की गुठलियां शुगर लेवल को नियंत्रित करने में अत्यंत कारगर मानी जाती हैं। इनका पाउडर बनाकर नियमित सेवन करने से मधुमेह के रोगियों को काफी लाभ मिलता है। यही कारण है कि इनकी बाजार में मांग बढ़ी है और व्यापारी अब इसे ग्रामीण स्तर पर खरीद रहे हैं।
🌳 वनों का संरक्षण है जरूरी
स्थानीय ग्रामीणों ने अपील की है कि जंगलों की अवैध कटाई पर पूरी तरह प्रतिबंध लगना चाहिए, क्योंकि ये जंगल ही उनकी रोजी-रोटी का मुख्य आधार हैं। वहीं, उप-वनमंडलाधिकारी राकेश शाक्यवार ने बताया कि यद्यपि जामुन 'लघु वनोपज' की श्रेणी में आधिकारिक रूप से शामिल नहीं है, लेकिन ग्रामीणों का यह प्रयास सराहनीय है। उन्होंने आम लोगों से पेड़ों की अवैध कटाई न करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की अपील की है।
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